लखनऊ। लखनऊ की पान की दुकानों और छोटे रिटेलर्स पर सिगरेट और गुटखा अब पहले से काफी महंगा बिक रहा है। कालाबाजारी के चलते छह रुपये वाली सिगरेट आठ रुपये में और 18 रुपये वाली सिगरेट 24 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह गुटखा के छोटे पैकेट्स में भी 1 से 2 रुपये प्रति पीस की बढ़ोतरी देखी जा रही है। थोक दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन फुटकर बाजार में यह महंगाई आम उपभोक्ता की जेब पर सीधा बोझ डाल रही है।
नई टैक्स व्यवस्था लागू होने से पहले ही आपूर्ति पर ब्रेक
लखनऊ व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष नवीन के अनुसार कंपनियों ने नई टैक्स व्यवस्था लागू होने से पहले ही आपूर्ति पर ब्रेक लगा दिया है, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो गई। उन्होंने कहा, थोक में रेट नहीं बढ़े हैं, लेकिन रिटेलर्स स्टॉक की कमी का फायदा उठाकर ज्यादा दाम वसूल रहे हैं। यह स्पष्ट कालाबाजारी है। नवीन ने आगे बताया कि फरवरी के दूसरे सप्ताह से कंपनियां नए रेट्स के साथ उत्पाद भेजना शुरू करेंगी, तब तक यह स्थिति बनी रह सकती है।
तंबाकू उत्पादों पर अब एमआरपी आधारित वैल्यूएशन
यह महंगाई केंद्र सरकार की नई एक्साइज ड्यूटी और जीएसटी व्यवस्था से जुड़ी है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू हो गई है। तंबाकू उत्पादों पर अब एमआरपी आधारित वैल्यूएशन सिस्टम शुरू हुआ है। गुटखा पर 91 प्रतिशत तक एक्साइज ड्यूटी, चबाने वाले तंबाकू और जर्दा पर 82 प्रतिशत ड्यूटी लगाई गई है। सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति स्टिक 2.05 से 8.50 रुपये तक अतिरिक्त एक्साइज लग रहा है।
स्टॉक रोककर शुरू कर दी कालाबाजारी
कई जगहों पर ट्रेडर्स ने नए टैक्स से पहले स्टॉक रोककर कालाबाजारी शुरू कर दी, जिससे लखनऊ समेत कई शहरों में कमी और ऊंचे दाम देखने को मिल रहे हैं। पान-मसाला और तंबाकू उत्पादों को 'सिन गुड्स' मानते हुए सरकार ने स्वास्थ्य और राजस्व बढ़ाने के मकसद से टैक्स बढ़ाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे खपत कम हो सकती है, लेकिन अल्पकाल में कालाबाजारी और स्मगलिंग बढ़ने का खतरा है।
20 से 30 परसेंट बढ सकते हैं सिगरेट के दाम
लखनऊ के कई इलाकों में उपभोक्ता शिकायत कर रहे हैं कि दैनिक आदत पूरी करने के लिए अब ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि स्टॉक कम होने से वे मजबूर हैं ज्यादा दाम रखने को। प्रशासन से अपील है कि कालाबाजारी पर नकेल कसी जाए, ताकि आम आदमी को राहत मिले। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि नए रेट्स लागू होने के बाद सिगरेट के दाम 20-30 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं, जिससे लंबे समय तक असर रहेगा।