मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 की मतगणना बस लास्ट स्टेज में चल रही है.. यानि कुछ ही देर में सभी सीटों के परिणाम आपके सामने होंगे.. रूझानों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनती हुई दिख रही है...वर्तमान में बीजेपी 100 के पार पहुंच चुकी है.. ऐसा लगाता है कि शिंदे ने एक बार फिर ठाकरे ब्रदर्स का गणित पूरी तरह से बिगाड़ दिया है.. वहीं धारावी से कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली है, जबकि कई वार्डों में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे और ठाकरे गुट), मनसे और AIMIM के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है। वार्डों में चल रही गिनती ने मुंबई की राजनीति को फिर गरमा दिया है। हालांकि कुछ ही देर में रिजल्ट सबके सामने होंगे...
धारावी से कांग्रेस की बड़ी जीत
बीएमसी चुनाव का पहला बड़ा नतीजा धारावी से सामने आया, जहां कांग्रेस उम्मीदवार आशा काले ने जीत दर्ज की। यह जीत कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब महानगर की राजनीति में मुकाबला बेहद कड़ा है। धारावी जैसे संवेदनशील और घनी आबादी वाले इलाके में कांग्रेस की जीत को अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
NOTA की मौजूदगी ने बढ़ाई सियासी चिंता
मुंबई के वार्ड क्रमांक 19 में NOTA को बढ़त मिलने की खबर ने सभी दलों को चौंका दिया है। NOTA का बढ़ना इस बात का संकेत है कि मतदाता कई जगह उम्मीदवारों से संतुष्ट नहीं हैं। नियमों के अनुसार, NOTA अधिक होने पर भी दूसरा सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार विजेता माना जाता है, लेकिन यह रुझान राजनीतिक दलों के लिए चेतावनी जरूर है।
आधिकारिक रुझान: बीजेपी आगे, मुकाबला अभी बाकी
46 वार्डों के शुरुआती आधिकारिक रुझानों में बीजेपी बढ़त बनाए हुए है। वहीं शिवसेना (उद्धव गुट), शिंदे गुट, कांग्रेस, मनसे और AIMIM भी कई सीटों पर मजबूत स्थिति में हैं। दक्षिण मुंबई में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन मजबूत दिख रहा है, जबकि पश्चिम और पूर्वी उपनगरों में कांटे की टक्कर बनी हुई है।
और वर्ली बने हाई-वोल्टेज वार्ड
गोरेगांव के वार्ड 50 और 51 में मुकाबला बेहद नजदीकी है। वार्ड 50 में बीजेपी और शिवसेना (UBT) के उम्मीदवारों के बीच कुछ वोटों का ही अंतर है। वहीं वर्ली वार्ड 194 में पहले राउंड के बाद शिवसेना के दोनों गुटों के बीच सीधी टक्कर ने राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है। हर राउंड के साथ समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
आरोप-प्रत्यारोप और सियासी बयानबाज़ी तेज
मतगणना के बीच फर्जी वोटिंग और वोटर लिस्ट से नाम गायब होने के आरोप भी सामने आए हैं। कुछ नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि दूसरी ओर जीत को विकास की राजनीति का परिणाम बताया जा रहा है। जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ेगी, बीएमसी की सत्ता की तस्वीर और स्पष्ट होती जाएगी।