मुंबई की सियासत में बड़ा उलटफेर हो गया है। एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में 30 साल बाद भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया है। 227 सीटों वाले इस महाचुनाव में बीजेपी गठबंधन ने 130 सीटों पर जीत दर्ज कर नगर निगम की सत्ता अपने नाम कर ली है, जबकि ठाकरे ब्रदर्स की जोड़ी चुनावी जंग में पिछड़ती नजर आई।
बीएमसी चुनाव में बीजेपी का ऐतिहासिक बहुमत
बीएमसी चुनाव 2026 के नतीजों ने साफ कर दिया है कि मुंबई की जनता ने इस बार बदलाव को चुना है। कुल 227 सीटों में से बीजेपी गठबंधन ने 130 सीटों पर बढ़त बनाते हुए 122 के बहुमत आंकड़े को पार कर लिया। यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि करीब तीन दशक बाद बीजेपी को बीएमसी में स्पष्ट बहुमत मिला है। इस परिणाम के साथ बीजेपी ने नगर निगम की कमान पूरी तरह अपने हाथ में ले ली है।
ठाकरे ब्रदर्स की रणनीति हुई फेल
चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के हाथ मिलाने को बड़ी राजनीतिक चाल माना जा रहा था। माना जा रहा था कि यह गठबंधन बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, लेकिन नतीजे इसके उलट आए। ठाकरे ब्रदर्स का गठबंधन महज 70 सीटों तक सिमट गया। यह परिणाम मुंबई की राजनीति में ठाकरे परिवार के प्रभाव में आई बड़ी गिरावट के तौर पर देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र के अन्य नगर निगमों में भी BJP गठबंधन की बढ़त
बीएमसी के साथ-साथ महाराष्ट्र के अन्य प्रमुख नगर निगमों में भी बीजेपी गठबंधन का दबदबा देखने को मिला है। नागपुर, पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगमों में बीजेपी गठबंधन ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है। वहीं नासिक और ठाणे में भी गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिली है, जिससे राज्य की शहरी राजनीति में बीजेपी की पकड़ और मजबूत होती नजर आ रही है।
कांग्रेस और अन्य दलों की सीमित मौजूदगी
चुनावी नतीजों में कांग्रेस को 11 सीटों पर संतोष करना पड़ा है, जबकि अन्य दलों और निर्दलीयों की मौजूदगी बेहद सीमित रही। यह परिणाम दर्शाता है कि शहरी मतदाताओं का झुकाव इस बार बड़े और निर्णायक नेतृत्व की ओर रहा। बीएमसी चुनाव ने यह भी साफ कर दिया है कि मुंबई की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।
मुंबई की राजनीति में नए युग की शुरुआत
बीएमसी में बीजेपी की यह जीत सिर्फ एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि मुंबई की सियासत में सत्ता संतुलन के बदलने का संकेत है। 30 साल बाद नगर निगम पर बीजेपी का कब्जा यह बताता है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में शहरी वोटर की भूमिका और भी निर्णायक होने वाली है।