बोर्ड परीक्षाओं का समय नजदीक आते ही छात्रों की चिंता बढ़ जाती है और इसी कमजोरी का फायदा साइबर ठग उठाने लगते हैं। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर ‘लीक पेपर’ के नाम पर फैलाए जा रहे झूठे दावों से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। ऐसे मामलों को देखते हुए साइबर पुलिस ने सख्त एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की अपील की है।
सोशल मीडिया पर सक्रिय ठग गिरोह
जैसे-जैसे कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं पास आ रही हैं, वैसे-वैसे सोशल मीडिया पर ठगों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्म पर ऐसे ग्रुप बनाए जा रहे हैं, जो बोर्ड परीक्षा के असली प्रश्नपत्र होने का दावा करते हैं। ये लोग छात्रों को लुभाने के लिए पेपर के कुछ हिस्से या उत्तर भेजते हैं और फिर उनसे पैसे मांगते हैं।
लीक पेपर पूरी तरह फर्जी
साइबर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट पर वायरल हो रहे लीक पेपर और उनके सॉल्यूशन पूरी तरह फर्जी हैं। बोर्ड परीक्षा का प्रश्नपत्र पूरी गोपनीयता के साथ तैयार किया जाता है और वह केवल परीक्षा केंद्र पर ही उपलब्ध होता है। सोशल मीडिया पर मिलने वाला कोई भी प्रश्नपत्र असली नहीं हो सकता, इसलिए छात्रों को ऐसे दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
फर्जी पेपर खरीदना भी अपराध
एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि पेपर लीक के नाम पर पैसे लेना और देना दोनों ही कानूनन अपराध हैं। यदि कोई छात्र या अभिभावक जानबूझकर ऐसे फर्जी पेपर खरीदता है, तो उस पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। यह न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि छात्र के करियर पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
छात्रों और अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह
साइबर पुलिस ने छात्रों को सलाह दी है कि वे किसी भी अनजान लिंक, मैसेज या ग्रुप से दूर रहें। केवल अपनी मेहनत और पढ़ाई पर भरोसा रखें। अभिभावकों को भी चाहिए कि वे बच्चों पर नजर रखें और उन्हें किसी भी तरह के लालच या दबाव में आने से रोकें। सही जानकारी के लिए सिर्फ बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट या स्कूल प्रशासन पर ही विश्वास करें।
संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें
पुलिस ने अपील की है कि यदि किसी को लीक पेपर से जुड़ा कोई संदिग्ध मैसेज, लिंक या कॉल प्राप्त होती है, तो उसे आगे फॉरवर्ड न करें। ऐसी जानकारी तुरंत प्रशासन या साइबर पुलिस को दें। समय पर सूचना मिलने से ठगों पर कार्रवाई की जा सकती है और अन्य छात्रों को नुकसान से बचाया जा सकता है।