ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव रोजमर्रा की जरूरतों पर भी दिखने लगा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कई उद्योगों की लागत बढ़ गई है। अब इसका सीधा असर भारत के बोतलबंद पानी के बाजार पर भी दिखाई देने लगा है।
बिसलेरी समेत कई ब्रांड्स ने बढ़ाए दाम
भारत की प्रमुख कंपनी Bisleri ने हाल ही में अपने उत्पादों की कीमतों में करीब 11 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। इससे 12 बोतलों के एक बॉक्स पर लगभग 24 रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। सिर्फ यही नहीं, Bailley और Clear Premium Water जैसे अन्य ब्रांड्स ने भी अपने दाम बढ़ा दिए हैं।
प्लास्टिक महंगा, इसलिए बढ़े पानी के रेट
दरअसल बोतलबंद पानी की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह प्लास्टिक पैकेजिंग की लागत है। पानी की बोतलें PET से बनती हैं, जो कच्चे तेल से तैयार होता है। युद्ध के चलते पॉलिमर और रेजिन की कीमतों में भारी उछाल आया है। प्लास्टिक के दाने, जो पहले करीब 115 रुपये प्रति किलो थे, अब बढ़कर लगभग 180 रुपये तक पहुंच गए हैं। इस बढ़ोतरी का सीधा असर पैकेजिंग इंडस्ट्री पर पड़ा है, जिससे पानी समेत कई उत्पाद महंगे हो गए हैं।
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आम लोगों पर बढ़ा असर
भारत में बड़ी संख्या में लोग पीने के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं। आंकड़ों के मुताबिक करीब 15 प्रतिशत शहरी और 6 प्रतिशत ग्रामीण परिवार अपनी जरूरतों के लिए पैकेज्ड पानी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कीमत बढ़ने से आम लोगों पर सीधा असर पड़ रहा है।
आगे और बढ़ सकती हैं मुश्किलें
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल संकट लंबा चला, तो पैकेजिंग की लागत और बढ़ सकती है। इससे बोतलबंद पानी के दाम और ऊपर जा सकते हैं। साथ ही उत्पादन में भी कमी देखने को मिल सकती है, क्योंकि कुछ प्लांट पहले ही बंद होने की कगार पर हैं। ऐसे में यह साफ है कि जंग का असर अब सीधे लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंच चुका है।