भारत-पाकिस्तान तनाव और तुर्की द्वारा पाकिस्तान के समर्थन के विरोध में देशभर में "Boycott Türkiye" अभियान जोर पकड़ रहा है। अब इस मुहिम में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का प्रसिद्ध जवाहर आम बाग भी शामिल हो गया है। करीब पचास साल पुराने इस बाग से अब तुर्की को आम नहीं भेजे जाएंगे। यहां से हर साल देश-विदेश में आम की कई किस्में जाती थीं, लेकिन इस बार बाग के प्रबंधकों और लोगों ने तुर्की से जुड़े कारोबार का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इस कदम को स्थानीय लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है।
भारत विरोधी तुर्की को आम नहीं भेजे जाएंगे
तुर्की द्वारा पाकिस्तान का समर्थन करने के विरोध में भारत में तुर्की के साथ व्यापारिक संबंधों का बहिष्कार शुरू हो गया है। इसी क्रम में भोपाल के जवाहर आम बाग ने भी ऐलान किया है कि इस साल उनके यहां से तुर्की को एक भी आम नहीं भेजा जाएगा, चाहे विदेशी खरीदार कोई भी हो। यह बाग अब केवल उन्हीं देशों और शहरों को आम सप्लाई करेगा, जो भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखते हैं।
जवाहर आम बाग की ऐतिहासिक विरासत
भोपाल के गोविंदपुरा स्थित भेल क्षेत्र में स्थित जवाहर आम बाग करीब पचास साल पुराना है। यह बाग भेल द्वारा विकसित किया गया था और यहां आम की लगभग 20 से अधिक दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां के आम मुंबई, बेंगलुरु, पुणे जैसे शहरों से लेकर चीन, जापान और खाड़ी देशों तक जाते हैं। नवाब खां, जो इस बाग की देखरेख कर रहे हैं, बताते हैं कि इस बार आम की पैदावार भी शानदार हुई है।
देशभर में हो रही है मांग
यह बाग लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 500 के करीब आम के पेड़ हैं। भेल क्षेत्र के स्थानीय निवासी और खरीदारों का कहना है कि इतनी वैरायटी कहीं और नहीं मिलती। यहां पर मौजूद खास प्रजातियों में पीटर इंग्लैंड, जाफरान कोहिनूर, हिमसागर, कृष्णभोग, महाराजा, डॉलर, और मलका प्रमुख हैं।
स्थानीय लोगों का मिल रहा समर्थन
तुर्की को आम न भेजने के फैसले का स्थानीय लोगों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि देशहित में ऐसा फैसला जरूरी था। तुर्की जैसे देश जो भारत विरोधी रुख अपनाते हैं, उन्हें किसी भी रूप में फायदा नहीं पहुंचाना चाहिए।