ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्म 'घूसखोर पंडत' का विरोध तेज हो गया है। लखनऊ में केस दर्ज होने के बाद अब वाराणसी में मनोज वाजपेयी के खिलाफ नारेबाजी की गई। मूवी के विरोध में ब्राह्मण बटुकों और सर्वसमाज के लोगों ने गंगा घाट पर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध करने वाले पंडित पुजारी और ब्राह्मणों का कहना है कि मनोज वाजपेयी का मानसिक संतुलन खराब हो गया है। वह बौद्धिक रूप से कमजोर हो गए हैं। वह खुद ब्राह्मण हैं और ब्राह्मणों के ऊपर इस तरह की टिप्पणी करके ऐसी फिल्म बना रहे हैं, जो ब्राह्मणों पर सवाल खड़े कर रहा है। वाराणसी के अहिल्याबाई घाट पर बड़ी संख्या में बटुक ब्राह्मणों ने मनोज वाजपेयी की फिल्म का विरोध किया।
उच्च पदों पर बैठे लोग ब्राह्मण का सम्मान करते हैं
मनोज वाजपेयी मुर्दाबाद के नारों और तख्तियों को हाथ में लेकर विरोध किया गया। मां गंगा की पूजा करने के बाद बटुकों ने मनोज वाजपेयी की बुद्धि को शुद्ध करने की भी प्रार्थना की है। प्रोटेस्ट को लीड कर रहे पवन शुक्ला ने कहा कि यह बहुत ही दर्द देने वाला है। मनोज खुद पंडित हैं और उन्होंने पंडत टाइटल को ही चुना है। पंडितों का अपमान लगातार किया जा रहा है और इसका बंद होना जरूरी है। उच्च पदों पर बैठे लोग ब्राह्मण का सम्मान करते हैं। ब्राह्मण सत्ता दिलाता है और ब्राह्मण सब कुछ करता है।
ब्राह्मण को नीचा दिखाना उचित नहीं है
जन्म से लेकर मृत्यु तक में ब्राह्मण का महत्वपूर्ण रोल होता है, लेकिन इस तरह से ब्राह्मण को नीचा दिखाना उचित नहीं है। ज्योतिषाचार्य और कर्मकांडी पंडित संजय पांडेय का कहना है कि मुझे तो लगता है कि मनोज वाजपेयी ब्राह्मण है ही नहीं, क्योंकि वह ब्राह्मण होकर अगर इस तरह से ब्राह्मणों का अपमान कर रहे हैं, जो उचित नहीं है। इस पर रोक लगनी चाहिए और इस फिल्म को तत्काल बंद किया जाना चाहिए। इसका नाम बदला जाना चाहिए क्योंकि ब्राह्मणों का इस तरह का अपमान होना ठीक नहीं है।