मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात ने कच्चे तेल के बाजार में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत अब 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। यह उछाल अचानक नहीं बल्कि पिछले 30 दिनों में तेजी से बढ़ते तनाव का नतीजा है। पहले जहां तेल करीब 70 डॉलर के आसपास था, वहीं अब इसमें करीब 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे पूरी दुनिया की नजरें इस संकट पर टिक गई हैं।
सप्लाई पर दबाव से बढ़ी चिंता
तेल की कीमतों में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह सप्लाई पर पड़ा दबाव है। मिडिल ईस्ट दुनिया का सबसे बड़ा तेल सप्लाई क्षेत्र माना जाता है। यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है। मौजूदा हालात में तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे कीमतों में तेजी बनी हुई है। यही कारण है कि आने वाले दिनों में भी कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बड़ा असर
ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का फैसला इस संकट की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है। इस रास्ते से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई गुजरती है। ऐसे में इसके प्रभावित होने से पूरी दुनिया में तेल की कमी का डर बढ़ गया है और इसी कारण कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं।
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गैस सप्लाई पर भी मंडरा रहा संकट
तेल के साथ-साथ गैस बाजार भी इस संकट से अछूता नहीं है। भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है। लेकिन कतर में जारी हमलों के कारण गैस सप्लाई पर असर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार निर्यात में करीब 17 प्रतिशत की कमी आई है। इससे भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
महंगे तेल और गैस का सीधा असर उन देशों पर पड़ता है जो आयात पर निर्भर हैं। भारत भी उनमें से एक है। तेल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, बिजली और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है। इससे उद्योगों पर दबाव बढ़ता है और अंत में इसका असर आम लोगों तक पहुंचता है। यानी महंगाई बढ़ने की आशंका अब और मजबूत हो गई है।
आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा बोझ
तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ता है। पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं। खाने-पीने से लेकर यात्रा तक हर चीज का खर्च बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की पूरी संभावना है और यही चिंता सबसे बड़ी बनकर सामने आ रही है।