Meerut News: प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को भी रिश्वत के लिए परेशान करने का मामला सामने आया है। आवास विकास परिषद के शास्त्रीनगर स्थित कार्यालय में तैनात आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव शर्मा को एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को छह हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने किनानगर निवासी महिला रंजना से मकान की रजिस्ट्री और पजेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के नाम पर 6200 रुपये मांगे थे।
फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर मांगी रकम
रंजना को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फरवरी में मकान आवंटित हुआ था। इसके लिए वह 76 हजार रुपये डाउन पेमेंट और तीन किस्तें जमा कर चुकी थीं। आरोप है कि उनकी फाइल अभिनव शर्मा के पास पहुंचने के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया अटक गई। कर्मचारी ने फाइल आगे बढ़ाने और रजिस्ट्री-पजेशन कराने के नाम पर 6200 रुपये की मांग की। लगातार रकम के लिए दबाव बनाए जाने पर रंजना ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत कर दी।
कान की बाली गिरवी रखकर जुटाए छह हजार
शिकायत के सत्यापन के बाद एंटी करप्शन टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। रंजना को केमिकल लगे नोट दिए गए। छह हजार रुपये जुटाने के लिए महिला ने अपनी कान की बाली गिरवी रख दी। मंगलवार को वह रकम लेकर आवास विकास कार्यालय पहुंची और आरोपी कर्मचारी को छह हजार रुपये दिए। रुपये लेते ही पहले से घात लगाए एंटी करप्शन टीम ने अभिनव शर्मा को पकड़ लिया। उसके कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद कर ली गई।
कार्यालय में मचा हड़कंप
सरकारी योजना के लाभार्थी से रिश्वत लेते कर्मचारी की गिरफ्तारी से आवास विकास कार्यालय में हड़कंप मच गया। टीम आरोपी को हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
अकेले कर्मचारी का खेल या पीछे कोई और?
अभिनव आउटसोर्स कर्मचारी है। ऐसे में एंटी करप्शन टीम अब यह भी जांच कर रही है कि रिश्वत की रकम की मांग उसने अकेले की थी या इसमें किसी अधिकारी अथवा दूसरे कर्मचारी की भी भूमिका थी। टीम यह भी पता लगाएगी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्य लाभार्थियों से रजिस्ट्री या पजेशन के नाम पर कहीं इसी तरह रकम तो नहीं मांगी गई।
चार बच्चों के साथ रहती है रंजना
रंजना के पति देवेंद्र प्राइवेट नौकरी करते थे। कोरोना काल में उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद रंजना अपने चार बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। मकान के लिए डाउन पेमेंट की रकम भी उन्होंने दो प्रतिशत ब्याज पर पैसा लेकर जमा की थी। आर्थिक परेशानी के बावजूद रिश्वत की मांग से परेशान होकर उन्होंने एंटी करप्शन टीम का सहारा लिया।