BRICS Summit Delhi : जब दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों के नेता एक ही मंच पर जुटते हैं तो पूरी दुनिया की नजर उस आयोजन पर टिक जाती है. इस बार ऐसा ही नजारा भारत की राजधानी दिल्ली में देखने को मिलेगा, जहां 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है. खास बात ये है कि इस सम्मेलन की मेजबानी भारत कर रहा है और इसकी कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में है, जहां दुनिया की करीब आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले देश दिल्ली में एक साथ बैठकर भविष्य की दिशा तय करेंगे. ऐसे में ये सम्मेलन सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक भूमिका का बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है.
क्या है ब्रिक्स और क्यों है इतना अहम?
ब्रिक्स की शुरुआत 20 साल पहले ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी. समय के साथ इसमें मिस्र, ईरान, इथियोपिया, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देश भी शामिल हो गए. आज ये समूह दुनिया की लगभग 47 प्रतिशत आबादी और करीब 40 प्रतिशत वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है. यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे प्रभावशाली समूहों में गिना जाता है.
दिल्ली में जुटेंगे बड़े नेता
सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आने की पुष्टि हो चुकी है। वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है. दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, ईरान, इंडोनेशिया और इथियोपिया के शीर्ष नेता भी दिल्ली पहुंच सकते हैं. कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे. इससे दिल्ली दो दिनों के लिए वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन जाएगी.
मोदी के सामने क्या होंगे बड़े मुद्दे?
सम्मेलन में व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, वित्तीय सहयोग और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने, विकासशील देशों को मजबूत करने और नई आर्थिक व्यवस्था को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा कई देशों के नेताओं के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी होने की संभावना है, जिन पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी.
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दुनिया को क्या संदेश देगा ये सम्मेलन?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सम्मेलन तय करेगा कि ब्रिक्स भविष्य में सिर्फ एक समूह रहेगा या वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली बड़ी शक्ति बनेगा। भारत की अध्यक्षता में होने वाला यह आयोजन दुनिया को यह संदेश भी देगा कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। ऐसे में दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन सिर्फ कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक स्वीकार्यता का भी बड़ा प्रतीक माना जा रहा है.