BRICS Summit India : भारत में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। दुनिया के कई बड़े देशों के नेता इस बैठक में शामिल होंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बड़े आयोजन पर होने वाला खर्च कौन उठाएगा और भारत को इससे क्या फायदा होगा? सम्मेलन की मेजबानी सिर्फ एक आयोजन नहीं है, बल्कि भारत के लिए व्यापार, निवेश और कूटनीति के लिहाज से भी बड़ा मौका है।
सम्मेलन का खर्च भारत पर
ब्रिक्स की अध्यक्षता इस साल भारत के पास है, इसलिए सम्मेलन की मेजबानी और उससे जुड़ी तैयारियों की जिम्मेदारी भी भारत की है। इसमें सुरक्षा, आयोजन स्थल, मेहमानों की व्यवस्था, यातायात और दूसरी तैयारियों पर सरकारी खर्च होता है। दिल्ली में सम्मेलन को लेकर बड़े स्तर पर सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
व्यापार बढ़ाने का मौका
ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाना भारत की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। समूह के देशों के बीच सामान और सेवाओं का कारोबार पहले ही काफी बढ़ चुका है। भारत इस मंच का इस्तेमाल अपने कारोबारियों और कंपनियों के लिए नए बाजार खोलने में कर सकता है।
छोटे कारोबार को फायदा
भारत की कोशिश छोटे और मध्यम कारोबारों को भी ब्रिक्स बाजार से जोड़ने की है। छोटे कारोबारियों को कर्ज, बाजार और दूसरे देशों में व्यापार के बेहतर मौके मिलें, इसके लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे आने वाले समय में छोटे उद्योगों को फायदा मिल सकता है।
डिजिटल भुगतान पर जोर
भारत ब्रिक्स देशों के बीच आसान और तेज भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहता है। इसमें भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था अहम भूमिका निभा सकती है। अगर अलग-अलग देशों के बीच भुगतान आसान होता है तो कारोबारियों और आम लोगों दोनों के लिए लेनदेन की लागत और समय कम हो सकता है।
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भारत की बढ़ेगी पहचान
ब्रिक्स सम्मेलन भारत को दुनिया के सामने अपनी आर्थिक और कूटनीतिक ताकत दिखाने का मौका देता है। चीन, रूस समेत कई बड़े देशों के नेताओं की मौजूदगी में भारत अपनी प्राथमिकताओं को मजबूती से सामने रख सकता है। साथ ही नए व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के रास्ते भी खुल सकते हैं।