BRICS vs NATO: नई दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच इस समूह की बढ़ती ताकत को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें शामिल कई देशों के नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने विदेशी मेहमानों के लिए डिनर का भी आयोजन किया। इसी दौरान यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर ब्रिक्स और नाटो की ताकत की तुलना की जाए तो इनमें से कौन ज्यादा मजबूत है। हालांकि, दोनों समूहों की सीधी तुलना करना थोड़ा मुश्किल है। इसकी वजह साफ है कि ब्रिक्स और नाटो का गठन अलग-अलग मकसद से हुआ है। नाटो देशों के बीच सैन्य सहयोग और सामूहिक सुरक्षा पर आधारित गठबंधन है, जबकि ब्रिक्स का फोकस आर्थिक सहयोग, व्यापार, विकास और वैश्विक मुद्दों पर आपसी तालमेल बढ़ाने पर है।
नाटो और ब्रिक्स में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
नाटो का आधार सामूहिक सुरक्षा है। इसके तहत किसी सदस्य देश पर सैन्य हमला होने की स्थिति में गठबंधन के दूसरे देश उसकी मदद के लिए आगे आ सकते हैं। इसके लिए नाटो के पास साझा सैन्य ढांचा, कमांड सिस्टम और रक्षा सहयोग की व्यवस्था है। इसके विपरीत ब्रिक्स के सदस्य देश अपनी-अपनी विदेश नीति और रक्षा रणनीति के हिसाब से फैसले लेते हैं। समूह के भीतर कोई ऐसी सामूहिक सैन्य संधि नहीं है जो सभी सदस्यों को किसी युद्ध में एक साथ उतरने के लिए बाध्य करे। इसलिए सैन्य टकराव की स्थिति में ब्रिक्स को नाटो की तरह एकीकृत सैन्य शक्ति मानना सही नहीं होगा।
रक्षा खर्च में नाटो की बड़ी बढ़त
अगर दोनों समूहों के रक्षा बजट की बात करें तो नाटो काफी आगे दिखाई देता है। आंकड़ों के मुताबिक नाटो देशों का कुल रक्षा खर्च 1.4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। इसमें अमेरिका अकेले करीब 935 अरब डॉलर खर्च करता है। दूसरी ओर ब्रिक्स देशों का संयुक्त रक्षा खर्च लगभग 480 अरब डॉलर बताया जाता है। इसमें चीन की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। ज्यादा रक्षा बजट की वजह से नाटो देशों के पास अत्याधुनिक हथियारों, सैन्य तकनीक, खुफिया तंत्र और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की अधिक क्षमता है।
सैनिकों की संख्या में ब्रिक्स आगे
रक्षा बजट में पीछे होने के बावजूद सैन्य संख्या के मामले में तस्वीर बदल जाती है। ब्रिक्स देशों के पास कुल सक्रिय सैन्यकर्मियों की संख्या 50 लाख से अधिक बताई जाती है। चीन, भारत और रूस की बड़ी सेनाएं इस संख्या को काफी बढ़ा देती हैं। वहीं नाटो के 32 सदस्य देशों की संयुक्त सक्रिय सैन्य ताकत करीब 33 लाख सैनिकों की है। यानी सैनिकों की संख्या के लिहाज से ब्रिक्स को बढ़त हासिल है।
परमाणु ताकत में दोनों के बीच कड़ा मुकाबला
परमाणु हथियारों के मामले में दोनों समूहों के बीच अंतर ज्यादा बड़ा नहीं दिखाई देता। ब्रिक्स में शामिल रूस, चीन और भारत के पास मिलाकर 6 हजार से अधिक परमाणु हथियार बताए जाते हैं। वहीं नाटो के परमाणु शक्ति संपन्न सदस्य अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के पास कुल मिलाकर 5800 से अधिक परमाणु हथियार हैं। इससे साफ है कि परमाणु क्षमता के मामले में दोनों पक्ष बेहद शक्तिशाली हैं।
हवा और समुद्र में नाटो का पलड़ा भारी
आधुनिक युद्ध में केवल सैनिकों की संख्या ही निर्णायक नहीं होती। तकनीक, खुफिया जानकारी, हवाई शक्ति और समुद्री क्षमता भी बेहद अहम भूमिका निभाती है। इन क्षेत्रों में नाटो को मजबूत माना जाता है। नाटो देशों के पास बड़ी संख्या में आधुनिक लड़ाकू विमान, निगरानी और खुफिया नेटवर्क तथा एयरक्राफ्ट कैरियर जैसी अत्याधुनिक सैन्य क्षमताएं हैं। दूसरी तरफ ब्रिक्स के प्रमुख देशों चीन, रूस और भारत के पास बड़ी जमीनी सैन्य ताकत है। इनके पास बड़ी संख्या में टैंक, बख्तरबंद वाहन और आर्टिलरी सिस्टम मौजूद हैं। यानी जमीन पर युद्ध की क्षमता में ब्रिक्स की ताकत काफी प्रभावशाली है, जबकि हाई-टेक एयर और समुद्री ऑपरेशन में नाटो को बढ़त मिलती है।
अर्थव्यवस्था में किसका पलड़ा भारी?
आर्थिक ताकत की बात करें तो नतीजा इस बात पर निर्भर करता है कि हम आंकड़ों को किस तरह देखते हैं। सामान्य यानी नॉमिनल जीडीपी के हिसाब से नाटो की अर्थव्यवस्था काफी बड़ी है। इसमें अमेरिका की बड़ी अर्थव्यवस्था और दुनिया में डॉलर की मजबूत पकड़ अहम भूमिका निभाती है। वहीं, अगर अर्थव्यवस्था को PPP यानी लोगों की खरीदने की क्षमता के आधार पर देखा जाए तो ब्रिक्स की ताकत काफी बढ़ जाती है। इस हिसाब से ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी दुनिया की अर्थव्यवस्था में करीब 40 प्रतिशत है। इसके अलावा ब्रिक्स देशों के पास दुनिया की बड़ी आबादी के साथ तेल, गैस और कई जरूरी खनिजों जैसे प्राकृतिक संसाधनों का भी बड़ा हिस्सा है।
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तो आखिर कौन ज्यादा ताकतवर?
सीधे तौर पर ब्रिक्स या नाटो में से किसी एक को हर क्षेत्र में ज्यादा शक्तिशाली कहना सही नहीं होगा। सैन्य गठबंधन, रक्षा बजट, हवाई शक्ति और साझा कमांड व्यवस्था में नाटो की स्थिति मजबूत है। वहीं ब्रिक्स के पास बड़ी आबादी, अधिक सक्रिय सैनिक, विशाल प्राकृतिक संसाधन और PPP के लिहाज से बड़ी आर्थिक क्षमता है। सबसे अहम बात यह है कि नाटो एक सैन्य गठबंधन है, जबकि ब्रिक्स सैन्य गठबंधन नहीं है। इसलिए दोनों की ताकत को समझने के लिए उनके उद्देश्यों और काम करने के तरीके को ध्यान में रखना जरूरी है।