
भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाजों को अब फिटनेस के लिए मैदान पर और ज्यादा मेहनत करनी होगी. बीसीसीआई (BCCI) ने उनकी फिटनेस जांचने के लिए एक नया मानक लागू किया है, जिसे ब्रोंको टेस्ट कहा जाता है. इस टेस्ट को पास करना गेंदबाजों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है. हाल ही में इंग्लैंड दौरे पर देखा गया कि भारतीय टीम के ज्यादातर तेज गेंदबाज फिटनेस की समस्या से जूझ रहे थे. जसप्रीत बुमराह केवल तीन टेस्ट खेल पाए, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा और आकाश दीप जैसे गेंदबाज चोट की वजह से पूरी ताकत से गेंदबाजी नहीं कर पाए. सिर्फ मोहम्मद सिराज ही पांचों टेस्ट मैच खेल सके. इन हालात को देखते हुए बीसीसीआई ने तय किया कि गेंदबाजों की फिटनेस को और मजबूत करने के लिए नया टेस्ट लागू किया जाए.
क्या है ब्रोंको टेस्ट?
ब्रोंको टेस्ट की शुरुआत न्यूजीलैंड और रग्बी जैसे खेलों से हुई थी. अब इसे भारतीय क्रिकेट में भी शामिल किया गया है. इस टेस्ट में एक खिलाड़ी को 20 मीटर की दौड़ से शुरुआत करनी होती है. इसके बाद उसे 40 मीटर और 60 मीटर की दौड़ लगानी पड़ती है. इन तीनों को मिलाकर एक सेट बनता है. एक खिलाड़ी को लगातार बिना रुके ऐसे पांच सेट पूरे करने होते हैं, यानी कुल 1200 मीटर दौड़. बीसीसीआई ने यह शर्त रखी है कि तेज गेंदबाजों को यह दूरी 6 मिनट के अंदर पूरी करनी होगी. जो गेंदबाज इस मानक पर खरा नहीं उतर पाएगा, उसके लिए टीम में जगह पाना मुश्किल होगा. इससे पहले भारतीय खिलाड़ियों के लिए 2 किलोमीटर टाइम-ट्रायल होता था. इसमें तेज गेंदबाजों को 8 मिनट 15 सेकंड में और बल्लेबाजों, स्पिनरों व विकेटकीपरों को 8 मिनट 30 सेकंड में दूरी पूरी करनी होती थी. हालांकि यह टेस्ट खिलाड़ियों की वास्तविक स्टैमिना और स्पीड को सही तरह से माप नहीं पाता था.
किसने दिया सुझाव?
ब्रोंको टेस्ट का सुझाव भारतीय टीम के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रॉक्स ने दिया था. हेड कोच गौतम गंभीर ने भी इस पर सहमति जताई. उनका मानना है कि तेज गेंदबाजों को जिम में समय बिताने से ज्यादा मैदान पर दौड़ना चाहिए. दौड़ने से स्टैमिना और रिकवरी पावर दोनों बढ़ती हैं, जो लंबे स्पेल में गेंदबाजी करने के लिए जरूरी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ भारतीय खिलाड़ी बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में यह टेस्ट पहले ही दे चुके हैं. शुरुआती अनुभव बताते हैं कि यह टेस्ट कठिन जरूर है, लेकिन गेंदबाजों की फिटनेस को एक नए स्तर पर ले जाएगा. ब्रोंको टेस्ट अब यो-यो टेस्ट के साथ मिलकर खिलाड़ियों की फिटनेस का बड़ा पैमाना बनेगा. इसका मकसद साफ है—भारतीय टीम के तेज गेंदबाज लंबे समय तक फिट रहें और चोटिल होकर टीम से बाहर न हों. आने वाले दिनों में यह टेस्ट भारतीय क्रिकेट का अहम हिस्सा बन सकता है.