उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बसपा ने जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति को तेज कर दिया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर बसपा अब केवल बड़ी रैलियों या बंद कमरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि 'डोर-टू-डोर' संपर्क और बूथ स्तर की मजबूती पर फोकस कर रही है। पार्टी 15 हजार बूथ कमेटियों का गठन करेगी, जो संगठन को जड़ों तक मजबूत बनाने का मुख्य आधार बनेगी।
मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित करना होगा
कमेटियों का मुख्य कार्य पार्टी की नीतियों को घर-घर पहुंचाना, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित करना होगा। 14 अप्रैल, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती तक इन 15 हजार बूथ कमेटियों का गठन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पहले, पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती (15 मार्च) पर बड़ा आयोजन करेगी, जिसमें कांशीराम के अनुयायियों को संदेश दिया जाएगा कि बसपा ही उनकी असली विरासत की वाहक है। यह आयोजन कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने और संगठन को एकजुट करने का माध्यम बनेगा।
अप्रैल से आकाश आनंद की बढेगी सक्रियता
प्रचार अभियान में बदलाव की सबसे बड़ी बात अप्रैल से आकाश आनंद की सक्रियता होगी। बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद रोड शो और जनसभाओं की श्रृंखला शुरू करेंगे। यह नया प्रचार स्टाइल रैलियों से आगे बढ़कर सड़कों पर नीले झंडों की मौजूदगी सुनिश्चित करेगा, जिससे युवा और ग्रामीण मतदाताओं को सीधे जोड़ा जा सके। आकाश आनंद के नेतृत्व में यह अभियान पार्टी को युवा ऊर्जा प्रदान करने और जमीनी स्तर पर जुड़ाव बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
सतीश मिश्रा के कंधों पर होगा ब्राह्मणों को जोडने का जिम्मा
इसके अलावा, प्रबुद्ध समाज (ब्राह्मण, त्यागी आदि) को पार्टी से जोड़ने का जिम्मा बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा संभाल सकते हैं। वे जिलों के दौरे कर इस वर्ग को बसपा के साथ लाने के प्रयास तेज करेंगे, जो 2007 की जीत की याद दिलाता है।बसपा ने स्पष्ट किया है कि 2027 का चुनाव अकेले लड़ेगी, कोई गठबंधन नहीं होगा। ये प्रयास दलित-मुस्लिम-ओबीसी गठजोड़ को मजबूत करने के साथ-साथ व्यापक सामाजिक आधार बनाने की दिशा में हैं। यदि ये रणनीतियां सफल रहीं, तो बसपा 2027 में मजबूत चुनौती पेश कर सकती है।