बुद्ध पूर्णिमा यानी वैशाख पूर्णिमा सिर्फ एक धार्मिक दिन नहीं, आत्मशुद्धि और मोक्ष की ओर बढ़ने का सुनहरा अवसर है। 12 मई 2025 को पड़ रही इस शुभ तिथि पर मध्य प्रदेश की पवित्र नदियां—जैसे शिप्रा, नर्मदा, सोन, ताप्ती—गुप्त पुण्य कमाने का द्वार खोलेंगी। चुपचाप इन नदियों में स्नान करने से पाप तो धुलेंगे ही, साथ ही पितृदोष से भी मुक्ति मिल सकती है।
शिप्रा: पुण्य कमाने का उज्जैन मॉडल
उज्जैन की शिप्रा नदी में बुद्ध पूर्णिमा के दिन स्नान करना हजारों गुना पुण्यकारी माना गया है। दीपदान और तर्पण करने से जीवन की उलझनों में शांति और गति मिलती है।
नर्मदा संगम: आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत
ओंकारेश्वर में नर्मदा और कावेरी का संगम किसी तपोभूमि से कम नहीं। यहां स्नान से सात जन्मों के पाप तक कटने की मान्यता है।
सोन और ताप्ती: मौन में छिपा है मोक्ष
इन नदियों पर भारी भीड़ नहीं होती, इसलिए जो साधक मौन और एकांत में पुण्य पाना चाहते हैं, उनके लिए ये स्थान आदर्श हैं।
बुद्ध का ज्ञान, दान और निर्वाण – एक ही दिन की त्रिवेणी
12 मई को ही भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और निर्वाण हुआ था। यानी यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा का महाकुंभ है। इस अवसर पर स्नान और दान करने से जीवन को नई दिशा मिल सकती है।