Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 संसद में पेश होने के बाद सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। जहां सत्ताधारी दल इसे विकासोन्मुखी बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल उठा रहा है। इसी कड़ी में बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने आम बजट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बजट की नीयत और असर दोनों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ज़मीनी अमल से ही जनता को राहत मिलती है।
बजट से झलकती है सरकार की सोच
मायावती ने कहा कि किसी भी सरकार का बजट उसकी नीति, नीयत और प्राथमिकताओं का आईना होता है। इससे साफ होता है कि सरकार वास्तव में गरीब, दलित और बहुजन वर्ग के हित में काम करना चाहती है या फिर बड़े पूंजीपतियों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस बजट से आम गरीब जनता को वास्तविक राहत मिलेगी।
नाम बड़े, दर्शन छोटे न हों
बसपा सुप्रीमो ने तंज कसते हुए कहा कि बजट में योजनाओं और परियोजनाओं के नाम भले ही आकर्षक और बड़े हों, लेकिन उनका असर ज़मीनी स्तर पर भी उतना ही मजबूत होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल वादे और आश्वासन काफी नहीं हैं, बल्कि उन पर ईमानदारी से अमल होना जरूरी है।
आत्मनिर्भरता और संविधान का सवाल
मायावती ने यह भी कहा कि अगर सरकार आत्मनिर्भर भारत की बात कर रही है, तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि सार्वजनिक क्षेत्र को कितना महत्व दिया गया है। साथ ही बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान की कल्याणकारी भावना के अनुरूप क्या ठोस कदम उठाए गए हैं, इस पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए।
पिछले बजट के वादों का हिसाब
उन्होंने पिछले साल के बजट का जिक्र करते हुए पूछा कि तब किए गए दावे और उम्मीदें कितनी पूरी हुईं। मायावती के मुताबिक, असली विकास का पैमाना जीडीपी नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में आने वाला गुणात्मक बदलाव है। बजट की सराहना से पहले इसका निष्पक्ष आकलन जरूरी है, ताकि यह तय हो सके कि इसका लाभ वास्तव में जनता तक पहुंच रहा है या नहीं।