केंद्रीय बजट 2026-27 एक फरवरी को पेश होना है और इसे लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में खास उत्सुकता है। देश में बेहतर और सुलभ इलाज की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हेल्थ सेक्टर चाहता है कि इस बार बजट में सिर्फ घोषणाएं नहीं बल्कि ज़मीन पर असर दिखाने वाले फैसले हों। अस्पतालों से लेकर मरीजों तक सभी को उम्मीद है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने पर ध्यान देगी।
पिछले वर्षों में बढ़ा खर्च, फिर भी जरूरत बाकी
पिछले चार सालों में स्वास्थ्य क्षेत्र पर सरकारी खर्च लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में स्वास्थ्य पर करीब 99,800 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इससे पहले भी हर साल बजट में बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बढ़ोतरी अभी भी देश की जरूरतों के हिसाब से कम है। आबादी और बीमारियों के बढ़ते बोझ को देखते हुए खर्च और बढ़ाने की मांग उठ रही है।
विकसित देशों से अब भी काफी पीछे भारत
अगर दूसरे देशों से तुलना करें तो भारत स्वास्थ्य खर्च के मामले में काफी पीछे है। भारत अपनी जीडीपी का सिर्फ 3 से 4 प्रतिशत ही स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करता है। वहीं अमेरिका 17 से 18 प्रतिशत और जापान करीब 10 प्रतिशत खर्च करता है। चीन भी तेजी से हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत भी बजट 2026 में बड़ा कदम उठाएगा।
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मिड-साइज़ अस्पतालों की बड़ी मांग
प्रकाश हॉस्पिटल नोएडा के चेयरमैन डॉ. वी एस चौहान का कहना है कि अब इलाज की मांग बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में मिड-साइज़ और सेकेंडरी अस्पतालों को मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए सस्ती पूंजी आसान नियम और समय पर भुगतान जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। सरकारी योजनाओं में भुगतान की देरी से अस्पतालों को परेशानी होती है।
सिस्टम मजबूत होगा तो मरीजों को राहत
डॉ. चौहान का मानना है कि अगर बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्यकर्मी और डिजिटल हेल्थ पर साफ नीति लाई गई तो सिस्टम ज्यादा मजबूत होगा। इससे इलाज की लागत भी काबू में रहेगी और मरीजों पर आर्थिक बोझ कम होगा। इसके साथ ही मेडिकल उपकरणों पर जीएसटी को आसान बनाने और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी करने की भी जरूरत है।
बजट 2026 से बदलेगी हेल्थ सिस्टम की दिशा
हेल्थ सेक्टर को उम्मीद है कि बजट 2026 सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि जमीनी बदलाव लाएगा। अगर मिड-साइज़ अस्पतालों को सही समर्थन मिला तो इलाज गांव और छोटे शहरों तक पहुंचेगा। अब देखना है कि सरकार इस बार हेल्थ सेक्टर को कितनी प्राथमिकता देती है और आम मरीज को इससे कितनी राहत मिलती है।