BUDGET 2026: वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया कि अब देश में इलाज सिर्फ पैसे वालों तक सीमित नहीं रहेगा। इस बार का बजट आम आदमी की सेहत और उसकी जेब दोनों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। सरकार का फोकस है कि बीमारी के डर के साथ इलाज के खर्च का डर भी खत्म किया जाए, ताकि हर नागरिक को समय पर इलाज मिल सके।
कैंसर और मधुमेह की दवाएं होंगी सस्ती
बजट की सबसे बड़ी राहत उन परिवारों के लिए है, जो कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियों के महंगे इलाज से परेशान रहते हैं। वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि इन गंभीर बीमारियों की दवाएं अब सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे गरीब और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का कहना है कि पैसे की कमी के कारण किसी मरीज का इलाज नहीं रुकना चाहिए।
दवा निर्माण में आत्मनिर्भरता पर जोर
इलाज को सस्ता और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने दवा निर्माण को भी मजबूत करने का फैसला लिया है। इसके लिए ‘बायो फार्मा शक्ति’ योजना शुरू की गई है, जिसके तहत 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इससे देश में ही जरूरी दवाओं का उत्पादन बढ़ेगा और बाहर से दवाएं मंगाने पर निर्भरता कम होगी। लंबे समय में इसका फायदा मरीजों को कम कीमत के रूप में मिलेगा।
बड़े शहरों की दौड़ होगी खत्म
अब इलाज के लिए दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में भटकना नहीं पड़ेगा। बजट में 3 नए एम्स बनाने की घोषणा की गई है। इससे दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी अच्छी इलाज सुविधा मिलेगी। नए अस्पताल खुलने से इलाज के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे।
रीजनल मेडिकल हब से बदलेगा सिस्टम
सरकार ने 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाने का भी ऐलान किया है। इन केंद्रों पर इलाज के साथ रिसर्च और डॉक्टरों की ट्रेनिंग पर भी काम होगा। सरकार का मानना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी और मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। इन हब्स के जरिए नए रोजगार के अवसर भी तैयार होंगे।
आयुर्वेद और रोजगार दोनों को ताकत
पारंपरिक इलाज पद्धति को आगे बढ़ाने के लिए जामनगर में आयुर्वेद से जुड़ा खास संस्थान बनाया जाएगा। इसके साथ ही 1.5 लाख केयर गिवर्स को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में नर्सिंग और मरीजों की देखभाल से जुड़े कामों में युवाओं के लिए नौकरी के नए रास्ते खुलेंगे। कुल मिलाकर बजट 2026 सेहत को हक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।