जैसे-जैसे 1 फरवरी पास आता है, पूरे देश की नजर बजट पर टिक जाती है। आम आदमी से लेकर कारोबारी तक, हर कोई यह जानना चाहता है कि इस बार सरकार क्या खास ऐलान करेगी। लेकिन बजट पेश होने से पहले एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत होती है हलवा सेरेमनी से। यही वह पल होता है, जब बजट को अंतिम रूप देने का संकेत मिल जाता है।
क्या होती है हलवा सेरेमनी
हलवा सेरेमनी एक प्रतीकात्मक परंपरा है। इसमें वित्त मंत्री की मौजूदगी में हलवा बनाया जाता है और बजट से जुड़े अधिकारी व कर्मचारी उसे खाते हैं। इसका मतलब होता है कि अब बजट का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसके बाद बजट के दस्तावेजों की छपाई और अंतिम तैयारी शुरू होती है। यह परंपरा सालों से चली आ रही है और इसे शुभ संकेत माना जाता है।
हलवे के बाद क्यों लग जाता है ‘लॉक’
हलवा सेरेमनी के बाद ही शुरू होता है सबसे अहम दौर, जिसे लॉक-इन पीरियड कहा जाता है। इस दौरान बजट से जुड़े सभी अधिकारी और कर्मचारी एक सुरक्षित परिसर में रखे जाते हैं। वे न बाहर जा सकते हैं और न ही किसी बाहरी व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं। इसका मकसद सिर्फ एक होता है, बजट की गोपनीयता बनाए रखना।
लॉक-इन पीरियड में क्या-क्या पाबंदी
इस अवधि में अधिकारियों को परिवार से मिलने की भी इजाजत नहीं होती। मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली जाती है। यहां तक कि किसी से सामान्य बातचीत भी नहीं हो सकती। हर कदम पर सुरक्षा और निगरानी रहती है, ताकि बजट से जुड़ी कोई भी जानकारी समय से पहले बाहर न जा सके।
कब और क्यों शुरू हुई यह परंपरा
लॉक-इन पीरियड की परंपरा ब्रिटिश शासन के समय से चली आ रही है। आजादी के बाद भी सरकार ने इसे जारी रखा। दरअसल, 1950 में बजट से जुड़ी अहम जानकारी लीक हो गई थी। इसके बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया। तभी से बजट से पहले अधिकारियों को एक तय समय के लिए अलग रखा जाने लगा।
कहां होती है बजट की छपाई
शुरुआत में बजट के दस्तावेज राष्ट्रपति भवन की प्रेस में छापे जाते थे। बाद में लीक की घटनाओं के चलते व्यवस्था बदली गई। फिर मिंटो रोड प्रेस में छपाई शुरू हुई। साल 1980 के बाद से बजट के कागज नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बनी विशेष प्रेस में ही छापे जाते हैं। आज भी इसी सख्त व्यवस्था के तहत बजट तैयार होता है, ताकि देश की सबसे बड़ी आर्थिक घोषणा पूरी तरह सुरक्षित रह सके।