संसद के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा उस वक्त गरमा गई, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। एक सैन्य अधिकारी की कथित किताब का हवाला देने और चीन–पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर बोलने को लेकर स्पीकर की आपत्तियों ने सदन का माहौल गर्म कर दिया, जिससे कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
धन्यवाद प्रस्ताव पर शुरू हुई बहस
बजट सत्र के चौथे दिन लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया गया। इस प्रस्ताव पर दोनों सदनों में कई घंटों तक चर्चा का समय तय किया गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने सरकार की नीतियों, विकास कार्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपनी-अपनी बातें रखनी शुरू कीं। इसी दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया।
किताब के हवाले पर उठा विवाद
राहुल गांधी ने सीमा विवाद और डोकलाम से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए एक पूर्व सैन्य अधिकारी की कथित पुस्तक का हवाला दिया। इस पर रक्षा मंत्री और अन्य सदस्यों ने सवाल उठाया कि जिस किताब का जिक्र हो रहा है, वह प्रकाशित भी हुई है या नहीं। स्पीकर ने सदन की परंपराओं और नियमों का हवाला देते हुए अखबारों की कटिंग या अप्रकाशित पुस्तकों के आधार पर चर्चा से बचने को कहा।
चीन–पाकिस्तान मुद्दे पर बढ़ी तकरार
जब राहुल गांधी ने भारत–चीन संबंधों और सीमा पर सैन्य गतिविधियों का जिक्र करना चाहा, तो स्पीकर ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दायरे में रहने की सलाह दी। इस पर राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि क्या चीन–पाकिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बात करना मना है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बार-बार रोका जा रहा है, जबकि सरकार के मंत्री इन विषयों पर अपनी बात रखते हैं।
हंगामा और कार्यवाही स्थगित
दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के बाद सदन में शोरगुल बढ़ गया। कुछ सदस्यों ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया, तो कुछ ने तथ्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। स्पीकर ने बार-बार सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की, लेकिन स्थिति नहीं संभली और अंततः लोकसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
सत्ता पक्ष–विपक्ष आमने-सामने
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सत्ता पक्ष ने कहा कि विपक्ष नियमों का पालन नहीं कर रहा, जबकि विपक्ष का आरोप था कि उसे बोलने से रोका जा रहा है। अन्य दलों के नेताओं ने भी हस्तक्षेप करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संतुलित और मर्यादित चर्चा की जरूरत पर जोर दिया। बजट सत्र के आगे के दिनों में भी इस बहस के और तेज होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।