देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रेल मंत्रालय अब इस प्रोजेक्ट को मिशन मोड में आगे बढ़ा रहा है, ताकि हर राज्य में हाईस्पीड ट्रेन का सपना साकार हो सके। इसके तहत रेलवे बोर्ड अलग-अलग सरकारी विभागों से मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने की योजना बना रहा है।
अब मिलेगा ‘बंडल क्लियरेंस’
नई योजना के तहत बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों से एक साथ मंजूरी दिलाने की तैयारी है। इसे ‘बंडल क्लियरेंस’ कहा जा रहा है। इससे नगर निगम, नगर पालिका और अन्य एजेंसियों की अलग-अलग मंजूरी लेने की जरूरत खत्म हो जाएगी और परियोजनाओं में होने वाली देरी कम होगी।
जमीन अधिग्रहण होगा आसान
अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जमीन अधिग्रहण और राइट ऑफ वे क्लियरेंस तेजी से पूरे हो सकेंगे। पहले अलग-अलग मंजूरी में महीनों लग जाते थे, जिससे परियोजनाएं अटक जाती थीं। अब एकीकृत प्रक्रिया से काम तेज होगा और समय की बचत होगी।
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पहले प्रोजेक्ट से मिला सबक
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के दौरान जमीन अधिग्रहण में हुई देरी ने सरकार को बड़ा सबक दिया। इस वजह से प्रोजेक्ट की लागत भी काफी बढ़ गई और समयसीमा प्रभावित हुई। अब सरकार ऐसी देरी से बचने के लिए नई रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है।
तकनीक से भी मिलेगी रफ्तार
रेल मंत्रालय निर्माण प्रक्रिया को तेज करने के लिए प्री-कास्ट सिस्टम और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही डिजाइन का मानकीकरण और बेहतर सप्लाई चेन विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य तेजी से पूरा हो सके।
7 नए कॉरिडोर से बदलेगा नक्शा
सरकार ने 2026-27 के बजट में 7 नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की घोषणा की है। इनमें मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बेंगलुरु, हैदराबाद से चेन्नई, चेन्नई से बेंगलुरु, दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी तक के रूट शामिल हैं।
देश की रफ्तार होगी दोगुनी
इस पूरी योजना का मकसद भारत में हाईस्पीड रेल नेटवर्क को मजबूत बनाना है। अगर मंजूरी और निर्माण दोनों तेजी से पूरे होते हैं, तो आने वाले समय में देश के बड़े शहर बुलेट ट्रेन से जुड़ जाएंगे और यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।