2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर शुल्क लागू होने की चर्चा के बीच कई पेट्रोल पंपों पर इसका असर दिखाई देने लगा है। कुछ जगहों पर ग्राहकों को कैश पेमेंट के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि नए नियमों को लेकर अभी भी कई लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण भुगतान के तरीकों में बदलाव देखने को मिल रहा है।
पेट्रोल पंपों पर लगे कैश पेमेंट के पोस्टर
राजस्थान के अलवर समेत कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर कैश पेमेंट से जुड़े पोस्टर लगाए गए हैं। कई संचालक ग्राहकों को 2000 रुपये से अधिक के ऑनलाइन भुगतान से बचने की सलाह देते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अभी तक अधिकांश स्थानों पर यूपीआई भुगतान स्वीकार किए जा रहे हैं, लेकिन नए नियमों की चर्चा ने ग्राहकों और व्यापारियों दोनों को सतर्क कर दिया है।
ग्राहक भी बदल रहे भुगतान का तरीका
कई ग्राहकों का कहना है कि वे 2000 रुपये से अधिक की राशि का भुगतान छोटे-छोटे हिस्सों में कर रहे हैं। कुछ लोग नकद भुगतान को प्राथमिकता देने लगे हैं, जबकि कई ग्राहक अभी भी स्पष्ट दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। डिजिटल भुगतान को लेकर फैली अलग-अलग जानकारियों ने लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
व्यापारियों को बढ़ी लागत की चिंता
पेट्रोल पंप संचालकों और अन्य व्यापारियों का कहना है कि यदि अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो इसका असर कारोबार की लागत पर पड़ सकता है। उनका मानना है कि छोटे मार्जिन वाले व्यवसायों के लिए अतिरिक्त खर्च चुनौती बन सकता है। इसी वजह से कई व्यापारी पहले से ही विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
क्या है एमडीआर को लेकर व्यवस्था
जानकारी के अनुसार, 2000 रुपये से अधिक के कुछ चुनिंदा यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू होने की बात कही गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसका प्रभाव सीमित श्रेणी के व्यापारियों पर पड़ेगा, जबकि अधिकांश छोटे कारोबारी इसके दायरे से बाहर रहेंगे। पेट्रोल पंपों के लिए भी अलग व्यवस्था की चर्चा है, जिसमें निश्चित शुल्क मॉडल लागू हो सकता है।
स्पष्ट दिशा-निर्देश का इंतजार
फिलहाल पेट्रोल पंप संचालक और ग्राहक दोनों ही अंतिम दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। अक्टूबर में प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने से पहले स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। तब तक कई जगहों पर कैश और डिजिटल भुगतान दोनों विकल्प जारी रहेंगे, लेकिन नए नियमों की चर्चा ने भुगतान के तरीकों को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है।