
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुभवी और बेहद सम्मानित अंतरिक्ष यात्री बट्च विलमोर ने 25 साल के शानदार करियर के बाद आधिकारिक रूप से सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) ले ली है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि रिटायरमेंट लेने के समय वो अभी भी अंतरिक्ष में हैं. जहां वो भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स के साथ बोइंग स्टारलाइनर मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर फंसे हुए हैं.
कौन हैं बट्च विलमोर?
बट्च विलमोर अमेरिका के टेनेसी राज्य से हैं. उन्होंने टेनेसी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर और मास्टर डिग्री हासिल की है. साथ ही उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ टेनेसी से एविएशन सिस्टम्स में मास्टर डिग्री भी ली है. वो पूर्व नौसेना पायलट रहे हैं और बाद में नासा के टेस्ट पायलट और फिर अंतरिक्ष यात्री बने.
अंतरिक्ष में आखिरी मिशन: Starliner का संकट
बट्च विलमोर और सुनीता विलियम्स 5 जून 2025 को बोइंग स्टारलाइनर कैप्सूल के जरिए एक टेस्ट फ्लाइट पर अंतरिक्ष में गए थे. यह फ्लाइट बोइंग और नासा की साझेदारी से बनाया गया एक नया मानव मिशन कैप्सूल है, जिसका यह पहला क्रू मिशन था. लेकिन लॉन्च के बाद से ही तकनीकी परेशानियां शुरू हो गईं.
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स्टारलाइनर में हीलियम लीकेज और थ्रस्टर की खराबी जैसी दिक्कतें सामने आईं. शुरुआत में यह मिशन 8 दिन का था, लेकिन अब ये अंतरिक्ष यात्री दो महीने से ज़्यादा समय से वहां फंसे हुए हैं. दोनों अब भी ISS पर मौजूद हैं और नासा इंजीनियरिंग टीम स्टारलाइनर की तकनीकी जांच कर रही है.
बट्च विलमोर का करियर
बट्च विलमोर ने 2000 में नासा जॉइन किया था. उन्होंने दो प्रमुख स्पेस मिशनों में हिस्सा लिया और एक बार स्पेस शटल और दूसरी बार सोयुज़ से अंतरिक्ष यात्रा की. उन्होंने ISS पर 178 दिन बिताए हैं और अंतरिक्ष में चार बार स्पेसवॉक की है. वो बेहद अनुशासित, शांत और भरोसेमंद अंतरिक्ष यात्री के रूप में पहचाने जाते हैं.
नासा का बयान
नासा ने बट्च की सेवा की प्रशंसा करते हुए एक बयान में कहा, "कैप्टन विलमोर की सेवा, नेतृत्व और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा. वो नासा की मानव स्पेसफ्लाइट विरासत का अहम हिस्सा रहेंगे."
अब आगे क्या होगा?
बट्च विलमोर ने रिटायरमेंट भले ले लिया हो, लेकिन उनकी जिम्मेदारी अभी खत्म नहीं हुई है. स्टारलाइनर को सुरक्षित तरीके से धरती पर वापस लाना उनकी और सुनीता विलियम्स की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. नासा उम्मीद कर रहा है कि अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में वो धरती पर वापस आ सकते हैं, अगर तकनीकी समस्याएं हल हो गईं.