CAA Supreme Court: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और उसके नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 5 मई 2026 से सुनवाई शुरू करेगा। अदालत के समक्ष कुल 243 याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें कानून की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। पीठ ने वकीलों से दलीलों के लिए आवश्यक समय की जानकारी मांगी और मामलों को सुव्यवस्थित ढंग से सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।
मामलों का वर्गीकरण
अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाओं को दो श्रेणियों में बांटा गया है—असम और त्रिपुरा से संबंधित मामले तथा देश के अन्य हिस्सों से जुड़े मामले। नोडल वकीलों को दोनों समूहों की पहचान कर सूची रजिस्ट्री को सौंपने को कहा गया है, ताकि सुनवाई व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ सके।
सुनवाई का कार्यक्रम
कोर्ट के अनुसार 5 मई को याचिकाकर्ताओं की दलीलें शुरू होंगी। 6 और 7 मई को भी बहस जारी रहेगी, जबकि 12 मई को प्रतिवादियों की ओर से जवाब रखा जाएगा। सुनवाई का मुख्य फोकस संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार से जुड़े सवालों पर रहेगा।
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कानून के प्रावधान
नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 दिसंबर 2019 में पारित हुआ था। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए पात्र माना गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस प्रावधान में मुस्लिम समुदाय को बाहर रखा गया है, जिससे धर्म के आधार पर भेदभाव का प्रश्न उठता है।
अंतरिम रोक से इनकार
अदालत पहले ही कानून पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर चुकी है। हालांकि मार्च 2024 में केंद्र सरकार द्वारा नियम अधिसूचित किए जाने के बाद नई अर्जियां दायर की गईं। अब आगामी सुनवाई में अदालत इन सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी और आगे की दिशा तय करेगी।