केंद्र सरकार ने रेलवे नेटवर्क मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने 24,815 करोड़ रुपये की लागत वाली दो बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में रेलवे कनेक्टिविटी का विस्तार होगा। सरकार का लक्ष्य इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का है।
यूपी में बनेगा 403 किमी का बड़ा कॉरिडोर
पहली परियोजना गाजियाबाद से सीतापुर के बीच तीसरी और चौथी लाइन बिछाने की है। इसकी कुल लंबाई 403 किलोमीटर होगी और इस पर 14,926 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर और सीतापुर जैसे अहम शहरों को जोड़ेगा। इससे दिल्ली-एनसीआर और अवध क्षेत्र के बीच ट्रैफिक दबाव कम होगा। साथ ही दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट और नैमिषारण्य जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी।
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आंध्र प्रदेश के बंदरगाहों को बड़ा फायदा
दूसरी परियोजना राजमुंदरी से विशाखापट्टनम के बीच तीसरी और चौथी लाइन बिछाने की है। इसकी लंबाई 198 किलोमीटर होगी और लागत 9,889 करोड़ रुपये तय की गई है। इस विस्तार से Visakhapatnam Port, गंगावरम, मछलीपट्टनम और काकीनाडा जैसे प्रमुख बंदरगाहों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे माल ढुलाई तेज, सस्ती और ज्यादा प्रभावी हो सकेगी। व्यापार और निर्यात गतिविधियों को इससे बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है।
रोजगार, रफ्तार और पर्यावरण को लाभ
इन परियोजनाओं से रेलवे लाइनों पर भीड़ कम होगी और मालगाड़ियों व यात्री ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी। ट्रैक क्षमता बढ़ने से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, जिसका असर सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है। निर्माण कार्यों से हजारों रोजगार अवसर पैदा होंगे। सरकार के मुताबिक इन प्रोजेक्ट्स से कार्बन उत्सर्जन में भी बड़ी कमी आएगी, जो करोड़ों पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ देगा।