CAFE-III Standards: भारत में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच कार खरीदारों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। सरकार ने कारों की फ्यूल एफिशिएंसी से जुड़े नए CAFE-III यानि Corporate Average Fuel Economy मानकों की अधिसूचना जारी कर दी है। ये नए नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे और मार्च 2032 तक प्रभावी रहेंगे। सरकार का लक्ष्य अगले पांच सालों में गाड़ियों की औसत ईंधन दक्षता में 16.7 प्रतिशत तक का सुधार करना है।
क्या है CAFE-III नियम और यह कैसे काम करेंगे?
CAFE का पूरा नाम Corporate Average Fuel Economy है। CAFE नियमों का मतलब किसी एक कार के माइलेज से नहीं है, बल्कि यह किसी भी कार कंपनी द्वारा एक साल में बेची जाने वाली सभी गाड़ियों की औसतन ईंधन खपत पर लागू होता है।
लक्ष्य हर साल होते जाएंगे सख्त
नए CAFE-III नियमों में कंपनियों के लिए ये लक्ष्य हर साल सख्त होते जाएंगे। उदाहरण के लिए तय संदर्भ वजन वाली गाड़ियों के लिए औसत ईंधन खपत 2027-28 में 3.996 लीटर/100 किमी से घटाकर 2031-32 में 3.3273 लीटर/100 किमी तक करने का लक्ष्य है। यह गणना मानक परीक्षण और निर्धारित फॉर्मूले पर आधारित है, इसलिए इसे किसी एक कार के सड़क पर मिलने वाले वास्तविक माइलेज के बराबर न समझें।
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हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों को मिलेगा बढ़ावा
कंपनी को अपना औसत प्रदर्शन सुधारने के लिए केवल पेट्रोल या डीजल इंजन में बदलाव करने की जरूरत नहीं है। कंपनियां बेहतर इंजन तकनीक, हाइब्रिड सिस्टम और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के जरिए भी अपने औसत प्रदर्शन में सुधार कर सकती हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सबसे ज्यादा क्रेडिट अंक मिलेंगे, जिससे कंपनियों का ओवरऑल स्कोर बेहतर होगा।इसके अलावा, CNG और दूसरे वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को भी मानकों में जगह दी गई।