
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में नोएडा प्राधिकरण में हुए बड़े घोटालों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2005 से 2018 के बीच प्राधिकरण में कुल 52,000 करोड़ रुपये के घोटाले हुए हैं। इन घोटालों में सबसे बड़ा मामला स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसमें अकेले 9,000 करोड़ रुपये का गोलमाल होने का दावा किया गया है।
स्पोर्ट्स सिटी घोटाला क्या है?
यह घोटाला साल 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के समय से जुड़ा है। नोएडा प्राधिकरण ने उस दौरान शहर में एक भव्य स्पोर्ट्स सिटी बनाने का फैसला किया। इसके लिए 2008 में एक जाने-माने बिल्डर को जमीन आवंटित की गई। हालांकि, बिल्डर ने इस जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए और 90 से ज्यादा अन्य बिल्डरों को बेच दिए, जिससे नियमों का उल्लंघन हुआ। आज तक इस जमीन पर स्पोर्ट्स सिटी की जगह कुछ फ्लैट्स के अलावा कुछ भी नहीं बना है और अधिकांश हिस्सा खाली पड़ा है। यह पूरा मामला फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है।
•2004: नोएडा प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में स्पोर्ट्स सिटी विकसित करने का प्रस्ताव पारित हुआ।
•2007-08: परियोजना का विस्तार किया गया और सेक्टर-76, 78, 79, 101, 102, 104 और 107 में इसे विकसित करने का निर्णय लिया गया।
•2008: स्पोर्ट्स सिटी के लिए जमीन एक बड़े बिल्डर को आवंटित की गई, जिसने बाद में जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े कर 90 से अधिक अन्य बिल्डरों को बेच दिए, जिससे नियमों का उल्लंघन हुआ।
CAG की रिपोर्ट में नाम गायब
CAG ने अपनी रिपोर्ट में घोटालों का तो विस्तृत ब्यौरा दिया है, लेकिन हैरत की बात यह है कि घोटाले के लिए जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों या कंपनियों के नाम का जिक्र नहीं किया गया है। यह सवाल आज भी बना हुआ है कि इतने बड़े भ्रष्टाचार के लिए कौन जिम्मेदार है। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी इस पर कोई जवाब नहीं देते और अक्सर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि मामला कोर्ट में है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पूर्व आईएएस अधिकारी सरदार मोहिंदर सिंह के कार्यकाल में सबसे अधिक घोटाले हुए थे।