.jpg%3Falt%3Dmedia%26token%3Db1d8315c-6831-4e88-8a8f-00c1869a7814&w=3840&q=75)
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि आरक्षित वर्ग का कोई भी उम्मीदवार अगर उम्र में छूट (Age Relaxation) या अन्य किसी तरह का आरक्षण लाभ लेता है, तो वह सामान्य श्रेणी (General Category) की सीट पर दावा नहीं कर सकता। अदालत ने त्रिपुरा हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि अर्धसैनिक बलों की भर्ती में उम्र सीमा का लाभ लेने वाले ओबीसी उम्मीदवारों को सामान्य वर्ग में गिना जाए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह नियमों के खिलाफ है और तभी संभव है जब भर्ती के प्रावधानों में इसकी अनुमति दी गई हो।
हाईकोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
यह विवाद कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की कांस्टेबल (GD) भर्ती से जुड़ा था, जिसके तहत बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, एनआईए, एसएसएफ और असम राइफल्स में भर्तियां होनी थीं। सामान्य उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा 18 से 23 वर्ष तय थी, जबकि ओबीसी वर्ग को तीन साल की छूट मिली थी। कई उम्मीदवारों ने छूट लेकर आवेदन किया लेकिन ओबीसी कोटे में चयनित नहीं हुए। उनके अंक सामान्य श्रेणी के अंतिम उम्मीदवारों से अधिक थे, जिसके आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि योग्यता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
केंद्र का तर्क और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
केंद्र सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और 1 जुलाई 1998 के ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला दिया। इस आदेश में स्पष्ट लिखा है कि यदि कोई उम्मीदवार उम्र या अन्य आरक्षण लाभ लेता है तो वह जनरल सीटों पर दावा नहीं कर सकता। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए कहा कि नियमों में यह मनाही है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि एक बार छूट लेने के बाद उम्मीदवार सामान्य श्रेणी में नहीं आ सकता। यह निर्णय भविष्य की भर्तियों के लिए भी दिशा-निर्देश का काम करेगा।