देश में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में नकदी का इस्तेमाल कम नहीं हुआ है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक करेंसी इन सर्कुलेशन यानी बाजार में चल रहे कुल नोटों का मूल्य करीब 40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह एक रिकॉर्ड स्तर माना जा रहा है। यानी लोग ऑनलाइन पेमेंट कर रहे हैं, लेकिन कैश भी उतना ही इस्तेमाल हो रहा है। डिजिटल और नकदी—दोनों साथ-साथ बढ़ते दिख रहे हैं।
SBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार नकदी बढ़ने के पीछे कई आर्थिक और व्यवहारिक कारण हैं। रिपोर्ट बताती है कि डिजिटल पेमेंट की लोकप्रियता के बावजूद कैश की जरूरत खत्म नहीं हुई। अलग-अलग परिस्थितियों में लोग अब भी नकद लेन-देन को सुरक्षित और सुविधाजनक मानते हैं। यही वजह है कि बाजार में नकदी का कुल प्रवाह लगातार बढ़ता जा रहा है।
GST नोटिस के बाद बदला रुख
रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ जगहों पर व्यापारियों ने डिजिटल पेमेंट से दूरी बनाकर नकद लेन-देन बढ़ाया है। उदाहरण के तौर पर कर्नाटक में हजारों छोटे व्यापारियों को UPI ट्रांजेक्शन के आधार पर जीएसटी नोटिस भेजे गए थे। इसके बाद कई व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान कम स्वीकार करना शुरू कर दिया। नतीजतन, उस इलाके में कैश निकासी बढ़ गई और हर महीने औसतन करोड़ों रुपये ज्यादा निकाले जाने लगे। इससे नकदी का प्रवाह तेज हो गया।
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ब्याज दर और ग्रामीण खपत का असर
नकदी की मांग सिर्फ व्यापारियों की वजह से नहीं बढ़ी। रिपोर्ट के अनुसार ब्याज दरों में कमी और ग्रामीण इलाकों में बढ़ती खपत भी बड़ा कारण है। जब ब्याज कम होता है, तो लोग पैसे को बैंक में रखने के बजाय खर्च या नकद रखने को प्राथमिकता देते हैं। वहीं ग्रामीण बाजारों में खरीदारी बढ़ने से नकदी की जरूरत बनी रहती है। यानी डिजिटल भुगतान बढ़ने के बावजूद आर्थिक परिस्थितियां नकदी की मांग को संतुलित कर रही हैं।
छोटे नोटों की मांग ज्यादा
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि छोटे मूल्य के नोटों का चलन बढ़ रहा है। 100, 200 और 500 रुपये के नोट ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं। मार्च 2025 तक सिर्फ 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी ही करीब 86% तक पहुंच गई। इसका मतलब रोजमर्रा के लेन-देन में छोटे और मध्यम मूल्य के नोट ज्यादा उपयोग हो रहे हैं।
RBI के निर्देश और भविष्य का ट्रेंड
भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बैंकों को एटीएम में 100 और 200 रुपये के ज्यादा नोट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इससे साफ है कि नकदी की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में डिजिटल और कैश दोनों भुगतान प्रणाली साथ-साथ चलती रहेंगी। पूरी तरह कैशलेस अर्थव्यवस्था की राह अभी लंबी दिखाई देती है।