Content Summary: जाति जनगणना के मोदी सरकार के ऐलान पर लालू यादव ने इतिहास पलटते हुए हमला बोला है। उन्होंने कहा कि समाजवादियों की सोच को दशकों बाद अपनाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने बुधवार को बड़ा फैसला लिया है। जिसमें मोदी सरकार ने आखिरकार जातिगत जनगणना को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है। अब मूल जनगणना में ही जातियों की गिनती की जाएगी। आपको बता दें कि ये वही मुद्दा है, जिसे लेकर विपक्ष लंबे समय से केंद्र पर दबाव बना रहा था। अब जब सरकार ने यह फैसला लिया, तो आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने इसे “अपनी जीत” बताया और इतिहास के पन्ने पलटे।
लालू यादव ने पहले ही लिया था निर्णय
लालू ने कहा कि 1996-97 में जब वे जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब संयुक्त मोर्चा सरकार ने 2001 की जनगणना में जातिगत गिनती कराने का निर्णय लिया था, लेकिन वाजपेयी सरकार ने उस पर अमल नहीं किया। आरजेडी सुप्रीमो ने कहा 2011 में एक बार फिर उन्होंने मुलायम और शरद यादव के साथ संसद ठप कर दी थी और मनमोहन सिंह की सरकार से सामाजिक-आर्थिक सर्वे का आश्वासन लिया था।
क्या बोले तेजस्वी यादव?
वहीं तेजस्वी यादव ने इसे समाजवादियों की 30 साल पुरानी जीत बताते हुए अगली मांग भी पेश कर दी। उन्होंने कहा कि अब विधानसभा चुनावों में पिछड़ों और अति पिछड़ों के लिए आरक्षण चाहिए। नीतीश कुमार ने भी जाति जनगणना के फैसले को “स्वागतयोग्य” बताया और कहा कि इससे योजनाएं बेहतर बनेंगी। सरकार ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि आज़ादी के बाद से उसने कभी जाति जनगणना नहीं कराई, जबकि अब भाजपा सरकार इसे मूल जनगणना में शामिल कर रही है ताकि सामाजिक ढांचे को मजबूती मिले।