Caste Census: विगत दिवस हुई केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक जातीय जनगणना का अहम फैसला लिया गया. कैबिनेट की बैठक प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में संपन्न हुई. लेकिन जो लोग जातीय जनगणना के पक्षधर थे. अब उन्हें भी डर सताने लगा है. जी हां यहां बात हो रही है सपा प्रमुख अखिलेश यादव की. जिन्होने विधानसभ से लेकर लोकसभा में जातीय जनगणना का मुद्दा जोरों से उठाया था. हालांकि सपा प्रमुख फैसले से खुश हैं, लेकिन उन्होने कहा कि यदि जनगणना ईमानदारी से नहीं हुई तो परेशानी होगी. उन्होने सरकार पर आरोप लगाया कि चुनाव की तरह धांधली से जातीय जनगणना नहीं होनी चाहिए..
सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर किया पोस्ट
दरअसल, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना का फैसला आने के चंद घंटे बाद ही सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर पोस्ट किया. जिसमें उन्होने कहा कि “जाति जनगणना का फ़ैसला 90% पीडीए की एकजुटता की 100% जीत है. हम सबके सम्मिलित दबाव से भाजपा सरकार मजबूरन ये निर्णय लेने को बाध्य हुई है. सामाजिक न्याय की लड़ाई में ये पीडीए की जीत का एक अतिमहत्वपूर्ण चरण है. भाजपा सरकार को ये चेतावनी है कि अपनी चुनावी धांधली को जाति जनगणना से दूर रखें. एक ईमानदार जनगणना ही हर जाति को अपनी-अपनी जनसंख्या के अनुपात में अपना वो अधिकार और हक़ दिलवाएगी, जिस पर अब तक वर्चस्ववादी फन मारकर बैठे थे. ये अधिकारों के सकारात्मक लोकतांत्रिक आंदोलन का पहला चरण है और भाजपा की नकारात्मक राजनीति का अंतिम. भाजपा की प्रभुत्ववादी सोच का अंत होकर ही रहेगा. संविधान के आगे मनविधान लंबे समय तक चल भी नहीं सकता है. ये INDIA की जीत है!”
विपक्ष लगातार उठा रहा था मांग
आपको बता दें कि कांग्रेस हो या समाजवादी पार्टी यानि एक तरह से पूरा विपक्ष लंबे टाइम से जातीय जनगणना की मांग उठा रहा था. लेकिन सरकार बार-बार मुद्दे को टाल रही थी. अचानक पहलगाम हमले के बाद मोदी की अध्यक्षता में जातीय जनगनणा के फैसले से सभी को चौंका दिया. साथ ही विपक्ष का मुद्दा ही खत्म कर दिया. जातीय जनगणना को लेकर बीजेपी के नेताओं में भी गजब का उत्साह देखने को मिला है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम मंत्रियों ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए प्रधानमंत्री के निर्णय का स्वागत किया.