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सीबीआई ने मेरठ के सीजीएचएस के एडिशनसरकारी विभागों से भ्रष्ट्राचार समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। सीबीआई ने रिश्वतखोरी मामले में मेरठ के सूरज कुंड स्थित सीजीएचएस के कार्यालय में छापा मारकर एडिशनल डायरेक्टर डा. अजय कुमार, कार्यालय अधीक्षक लवेश साेलंकी व एक प्राइवेट व्यक्ति रईस अहमद को पांच लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने आरोपियों के विभिन्न ठिकानों ,प्रतिष्ठानों पर भी छापेमारी की है। सुबह होने तक जांच जारी है। दोनो अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
दरअसल सीबीआई से निजी अस्पताल की और शिकायत की गयी थी कि मेरठ व उसके आसपास विभिन्न नामों से अस्पतालों का संचालन किया जाता है। शिकायत करने वाले ने आरोप लगाया कि 8 जुलाई को सीजीएचएस मेरठ की टीमें ने दो अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया था। टीम ने अनुचित लाभ लेने के इरादे से दोनो अस्पतालो में कमियां निकाल कर नोटिस जारी कर दिया। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने सीजीएचएस के सूचीबद्ध अस्पतालों की सूची से अस्पतालों के नाम न हटाने के लिए पचास लाख की रिश्वत मांगी गयी। रकत को शीघ्र देने के लिए कहा गया। बातचीत करने के बाद आरोपी एडिशनल डायरेक्टर पचास लाख की पहली की रकम पांच देने के लिए तैयार हो गये। इस पर सीबीआई ने अपना जाल फैला दिया। योजना के अनुसार अस्पताल संचालक कैमिकल लगे पांच लाख रूपये लेकर सूरज कुंड स्थित सीजीएचएस कार्यालय पहुंचा । जैसे ही उसने रूपये निकाल कर दिये । तभी सीबीआई ने धावा बोलते हुए एडिशनल डायरेक्टर ,कार्यालय अधीक्षक व निजी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को छापे की भनक काफी देर बाद लगी। इस दौरान गिरफ्तारी के डर से विभाग के अन्य कर्मचारी वहां से भाग निकले। सभी ने अपने मोबाइल को बंद कर लिया।
पल्लवपुरम पहुंची सीबीआई की टीम
सीबीआई के सूरज कुंड छापेमारी के बाद सीबीआई टीम एडिशनल डायरेक्टर के पल्लवपुरम स्थित आवास पर पहुंची। वहां पर टीम ने बैंक से संबधित जानकारी , कागजातों की व जांच पड़ताल की। इस दौरान किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया।
निरीक्षण के नाम पर चल रहा बड़ा खेल
सीजीएचएच में ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों व उनके परिवारों का उपचार किया जाता है। गंभीर बीमारी होने पर सीजीएचएस के चिकित्सक मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराते है। मरीज के उपचार में हुूए खर्चे का भुगतान बिल मिलने के बाद सीजीएचएस की ओर से भुगतान किया जाता है। पूर्व में भी एक ऐसा मामला दर्ज किया गया था। दरअसल सीजीएचएस स्कीम के पैनल में शामिल होने करने के लिए रिश्वत ली जाती है। पैनल में बने रहने के लिए यह खेल किया जा रहा है।