CBRN Vehicles : रक्षा मंत्रालय की हालिया बैठक में सेना के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की रक्षा खरीद को मंजूरी दी गई है। इस फैसले के तहत थलसेना, वायुसेना और नौसेना के लिए कई नए हथियार, सैन्य वाहन और उपकरण खरीदे जाएंगे। रक्षा खरीद की प्रक्रिया में इसे आवश्यकता की स्वीकृति माना जाता है, जो किसी भी बड़े सैन्य सौदे का शुरुआती चरण होता है। इस मंजूरी के बाद अब विभिन्न परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
सेना को मिलेंगे नए वाहन
थलसेना के लिए कई प्रकार के सैन्य वाहनों की खरीद को स्वीकृति मिली है। इनमें हाई मोबिलिटी वाहन, माइन बिछाने वाले विशेष वाहन, ट्रॉल टैंक और पुल निर्माण प्रणाली शामिल हैं। इसके अलावा ध्रुव हेलीकॉप्टरों की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। हालांकि इन सभी में सबसे अधिक चर्चा सीबीआरएन वाहनों की हो रही है, जिन्हें भविष्य के विशेष खतरों से निपटने के लिए अहम माना जा रहा है।
क्या हैं सीबीआरएन वाहन
सीबीआरएन का मतलब रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से है। ये विशेष वाहन ऐसे किसी भी हमले या प्रदूषण वाले क्षेत्र का पता लगाने, उसकी पहचान करने और निगरानी करने में सक्षम होते हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार ये वाहन दूषित इलाकों को चिह्नित करने का काम भी करेंगे। किसी संदिग्ध हमले की स्थिति में यह तुरंत जानकारी दे सकेंगे कि खतरा किस प्रकार का है और उसका प्रभाव कितना है।
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सैनिकों की सुरक्षा में अहम
इन वाहनों की खासियत यह है कि इनके भीतर मौजूद सैनिक खतरनाक परिस्थितियों में भी काम कर सकते हैं। वाहन का ढांचा इस तरह तैयार किया जाता है कि रासायनिक या रेडियोलॉजिकल प्रभाव से सैनिकों को सुरक्षा मिल सके। जरूरत पड़ने पर वाहन में मौजूद सैन्यकर्मी दुश्मन के खिलाफ कार्रवाई भी जारी रख सकते हैं। इसी कारण आधुनिक युद्ध और आपदा प्रबंधन दोनों में इनकी उपयोगिता काफी बढ़ जाती है।
पहले भी हो चुका है विकास
डीआरडीओ ने वर्ष 2017 में ऐसे विशेष वाहन सेना को सौंपे थे। बाद के वर्षों में स्वदेशी कंपनियों के सहयोग से इनके नए संस्करण भी विकसित किए गए। कुछ मॉडल बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों की तरह दिखाई देते हैं और कठिन इलाकों में संचालन की क्षमता रखते हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सेना भविष्य में किस मॉडल की खरीद करेगी, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता दी जाएगी।
क्यों बढ़ी जरूरत
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते सुरक्षा माहौल में ऐसे वाहनों की आवश्यकता बढ़ गई है। भारत के पड़ोस में मौजूद परमाणु क्षमताओं वाले देशों और रासायनिक या जैविक खतरों की आशंकाओं को देखते हुए सेना अपनी तैयारी मजबूत कर रही है। रक्षा मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि नई रक्षा खरीद का अधिकांश हिस्सा स्वदेशी होगा। ऐसे में सीबीआरएन वाहन न केवल सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाएंगे, बल्कि किसी भी असामान्य खतरे की स्थिति में सेना की प्रतिक्रिया क्षमता को भी मजबूत करेंगे।