अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक अहम फैसला सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। 21 अप्रैल को खत्म हो रहे सीजफायर को बढ़ाने का निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। हालांकि इस राहत भरे कदम के बावजूद जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
होर्मुज पर नाकाबंदी जारी
सीजफायर बढ़ाने के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान की ओर से ठोस प्रस्ताव नहीं आता, तब तक यह ब्लॉकेड हटाया नहीं जाएगा। इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका दबाव की रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा है।
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ईरान को भारी आर्थिक नुकसान
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज बंद रहने से ईरान को रोजाना करीब 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार, यही वजह है कि तेहरान इस मार्ग को जल्द खोलना चाहता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहे, लेकिन अंदरखाने वह इस रास्ते को चालू करने के लिए प्रयास कर रहा है। तेल निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए यह नुकसान बेहद बड़ा माना जा रहा है।
बातचीत से पहले रखी गई शर्त
अमेरिका ने साफ कर दिया है कि किसी भी समझौते से पहले ईरान को एक संयुक्त प्रस्ताव देना होगा। ट्रंप ने कहा कि बिना ठोस पहल के कोई भी डील संभव नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका की सेनाएं पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर हैं। इससे साफ है कि कूटनीतिक बातचीत के साथ-साथ सैन्य दबाव भी बनाए रखा जा रहा है।
पाकिस्तान की भूमिका और आगे की राह
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीजफायर बढ़ाने का फैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया गया। अब नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान कब और क्या प्रस्ताव पेश करता है। फिलहाल स्थिति नाजुक बनी हुई है, जहां एक तरफ बातचीत की उम्मीद है तो दूसरी तरफ टकराव का खतरा भी बरकरार है।