सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ बुधवार को 44 सील कमर्शियल अवैध निर्माणों में से 6 पर बुलडोजर चला दिया। इस दौरान महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सुबह 6 बजे से दोपहर 1 बजे तक चली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में न तो मौके पर कोई जनप्रतिनिधि पहुंचा और न ही कोई भाजपा नेता। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 21 सितंबर को है। माना जा रहा है कि परिषद के अधिकारियों ने कोर्ट में अपना जवाब तैयार करने के लिए आज की कार्रवाई की है।
सब सोए हुए थे, छावनी बन गया सेंट्रल मार्केट
सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों व निवासियों ने आरोप लगाया कि परिषद के अधिकारियों ने भारी पुलिस बल से पूरा क्षेत्र उस समय सील किया, जब यहां सोए हुए थे। सुबह 6 बजे से पहले ही परिषद और पुलिस अधिकारियों ने यहां पहुंचकर पूरे क्षेत्र को पुलिसकर्मियों से सील करवा दिया था और इसके बाद बुलडोजर यहां घूमने शुरू हो गए थे। यहां के लोगों की आंखें खुलीं तो सब हक्के-बक्के रह गए, क्योंकि उन्हें इस बात का बिल्कुल भी इल्म नहीं था कि परिषद सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर को सुनवाई के साथ फिर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर देगा। पुलिस ने यहां बेहद सख्ती दिखाई। न तो किसी को बाहर जाने दिया गया और न ही बाहर के लोगों को अंदर आने दिया गया। इस दौरान मीडियाकर्मियों को भी घटनास्थल पर जाने से रोका गया और कई बार झड़पें हुईं। बाद में एडीएम सिटी बृजेश कुमार सिंह, एसपी सिटी विनायक भोसले और परिषद के अन्य अधिकारी भी पहुंचे।
2 सितंबर को मिला था आश्वासन
आवास विकास परिषद की ओर से सील किए गए 44 भूखंडों में से कुछ भूखंड स्वामी पिछले दिनों अपने प्रतिष्ठानों में किए गए अवैध निर्माण को खुद हटाने में जुट गए थे। इसका उद्देश्य 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सनुवाई से पहले अपने भूखंडों को मानकों के अनुसार तोड़फोड़ करके रिपोर्ट तैयार करने का रहा। शास्त्रीनगर में गठित संघर्ष समिति ने मेरठ बंद का ऐलान किया था और गुरुद्वारा रोड पर प्रदर्शन तब समाप्त हुआ था, जब यहां के लोगों को 21 सितंबर तक परिषद द्वारा किसी भी तरह की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद कई स्वामियों ने मानकों से यहां खुद ही तोड़फोड़ शुरू कर दी थी। गौरतलब है कि 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने 44 व्यावसायिक परिसर के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का आदेश दिया था।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, पोर्कलेन भी लाए
शास्त्रीनगर में आरटीओ रोड पुलिस चौकी चौराहे से नई सड़क के बीच जिन भूखंडों के अवैध निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी थी, उनमें 697/2, 492/3, 498/3, 1313/3,1314/3, 12/2, 670/6 समेत कई निर्माण शामिल हैं, क्योंकि आवास विकास परिषद की ओर से सील किए गए 44 भूखंडों में से 16 परिसरों में ही सेटबैक छोड़ने की कार्रवाई पूरी हुई थी। 28 भूखंड स्वामियों ने अभी तक अपने प्रतिष्ठानों से अवैध निर्माण नहीं हटाया था। सुबह के समय भारी संख्या में पुलिस की तैनाती और कार्रवाई से यहां के व्यापारी और निवासी हर कोई सहम गया। उनकी आवाज सुनने वाला भी आज कोई मौजूद नहीं था। 6 भूखंडों के अवैध निर्माणों के हिस्सों को जेसीबी मशीनों द्वारा अलग-अलग टीमों द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। जी प्लस थ्री भवन का एक हिस्सा ऊंचाई और मजबूती के कारण जेसीबी से नहीं टूट पाया। इसके बाद पोर्कलेन मशीन लाई गई। तब जाकर इस भवन के हिस्से को तोड़ा गया।
जिम्मेदार गायब, महिलाएं बिलखती रहीं
परिषद की ओर से सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में 6 भूखंडों के अवैध हिस्सों को तोड़ने की कार्रवाई सुबह 6 बजे से दोपहर 1 बजे तक चली। इस दौरान महिलाएं यहां पहुंचीं। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर उनका रो-रोकर बुरा हाल था। कभी वे परिषद के अधिकारियों के सामने बिलखतीं तो कभी पुलिस अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ातीं, तो कभी अपने परिजनों से गले लगकर दहाड़ें लगा रही थीं। उनकी बात सुनने के लिए न तो कोई जनप्रतिनिधि वहां मौजूद था, न वरिष्ठ व्यापारी नेता और न ही भाजपा नेता। जबकि इनमें से अधिकतरों का निवास शास्त्रीनगर में ही है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान यहां के निवासियों व व्यापारी नेताओं का कहना था कि किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया और सेंट्रल मार्केट प्रकरण पर ढुलमुल नीति अपनाते रहे। कार्रवाई से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार सामने आए। इसमें लोगों ने सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों व निवासियों के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी।