नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर में मौजूद 100 साल से ज्यादा पुरानी कदीमी मस्जिद को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत इलाके में बड़े निर्माण कार्य होने हैं। इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज किए जाने और हाल में जारी टेंडर के बाद मस्जिद के अस्तित्व को लेकर आशंका बढ़ गई है।
हाईकोर्ट का फैसला और सरकार का भरोसा
2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि जब तक सीधा खतरा साबित न हो, तब तक दोबारा याचिका नहीं सुनी जाएगी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत में भरोसा दिलाया था कि धार्मिक स्थलों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। लेकिन अब नई परिस्थितियों ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
टेंडर दस्तावेज में क्या है?
19 जनवरी 2026 को CPWD ने कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्विकास के लिए टेंडर जारी किया। आधिकारिक सूची में मस्जिद को हटाने वाली संरचनाओं में साफ तौर पर शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, टेंडर के साथ लगी ड्रॉइंग में नए प्रस्तावित भवन के नक्शे में मस्जिद को अपने पुराने स्थान पर नहीं दिखाया गया है, जिससे भ्रम की स्थिति बन गई है।
वक्फ बोर्ड और इमाम का पक्ष
कदीमी मस्जिद कृषि भवन के खुले प्रांगण में स्थित है और यहां मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारी नमाज अदा करते हैं। यह मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में नहीं है, लेकिन 1970 के राजपत्र में इसे वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था। वक्फ बोर्ड का कहना है कि मस्जिद भवन से भी पुरानी है और इसे हटाना उचित नहीं होगा।
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नई इमारतों की योजना
CPWD ने ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ की इमारत 4 और 5 के निर्माण के लिए टेंडर निकाला है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3,006 करोड़ रुपये है और इसे 24 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य है। बोली लगाने की अंतिम तारीख 13 फरवरी तय की गई है। यह प्रोजेक्ट सेंट्रल विस्टा योजना का अहम हिस्सा है।
पहले भी हटाए जा चुके हैं धार्मिक स्थल
इससे पहले उपराष्ट्रपति के पूर्व आवास परिसर में स्थित एक मस्जिद और एक मंदिर को भी परियोजना के तहत हटाया जा चुका है। ऐसे में कदीमी मस्जिद को लेकर चिंता और बढ़ गई है। अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार आगे क्या फैसला लेती है और क्या मस्जिद को सुरक्षित रखा जाएगा या नहीं।