Chaitra Navratri 2026 Day 4: चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित होता है, जिन्हें सृष्टि की आदिशक्ति माना जाता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और सही रंग के वस्त्र धारण करने से साधक को सुख, समृद्धि और ऊर्जा की प्राप्ति होती है। साथ ही, मां को पसंदीदा भोग अर्पित करने से विशेष कृपा बरसती है।
चौथे दिन का शुभ रंग और उसका महत्व
नवरात्रि के चौथे दिन का शुभ रंग नारंगी (ऑरेंज) माना जाता है। यह रंग ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन नारंगी रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करने से मन में आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। यह रंग मां कूष्मांडा की तेजस्विता और शक्ति का भी प्रतीक है।
मां कूष्मांडा की पूजा विधि
इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ रखें। मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर उन्हें फूल, अक्षत और रोली अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर मां के मंत्रों का जाप करें। पूजा के दौरान “ॐ देवी कूष्मांडायै नमः” मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
मां कूष्मांडा को लगाएं यह खास भोग
मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। इसके अलावा मीठा दही, कद्दू से बने व्यंजन और फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। कद्दू (कूष्मांड) से जुड़े भोग का महत्व इसलिए भी है क्योंकि मां का नाम ही कूष्मांडा है। भोग अर्पित करने के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार और जरूरतमंदों में बांटना शुभ होता है।
पूजा से मिलने वाले लाभ और महत्व
मां कूष्मांडा की आराधना करने से जीवन में स्वास्थ्य, धन और यश की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से इस दिन पूजा करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है। नवरात्रि का यह दिन विशेष रूप से आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।