मार्च 2026 की शुरुआत एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के साथ हो रही है। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जिसे लेकर ज्योतिष और धर्म दोनों दृष्टियों से उत्सुकता बनी हुई है। खगोलविदों के अनुसार यह ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा, जबकि भारत में इसकी आंशिक दृश्यता लगभग 25 मिनट तक रहने की संभावना है। चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
भारत में ग्रहण का समय और दृश्यता
बताया जा रहा है कि यह चंद्र ग्रहण देर रात से शुरू होकर निर्धारित समय तक प्रभावी रहेगा। भारत में इसका सीमित प्रभाव दिखेगा, इसलिए केवल कुछ चरण ही स्पष्ट रूप से नजर आ पाएंगे। मौसम साफ होने पर लोग इसे खुली आंखों से भी देख सकेंगे, क्योंकि चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष सुरक्षा उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, स्थानीय समय और अवधि शहरों के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है।
सूतक काल के नियम क्या हैं
हिंदू मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है। आमतौर पर चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक माना जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ व मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।
राशियों पर संभावित प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण को संवेदनशील घटना माना जाता है, क्योंकि चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है। कुछ राशियों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जबकि कुछ को मानसिक तनाव या निर्णय लेने में असमंजस का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ग्रहण काल में शांत मन से ध्यान, मंत्र जाप या प्रार्थना करने से नकारात्मक प्रभाव कम किए जा सकते हैं।
धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी चंद्र ग्रहण एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है। इसका मानव जीवन पर प्रत्यक्ष भौतिक प्रभाव नहीं माना जाता, लेकिन आस्था और परंपराएं इसे विशेष महत्व देती हैं। इसलिए लोग अपनी मान्यताओं के अनुसार नियमों का पालन करते हुए इस घटना को देखते हैं। इस तरह 3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण आस्था और विज्ञान दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा।