
यूपी के मेरठ में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद लगातार जनसभाएं कर रहे हैं. वे 2027 के विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनाव से पहले अपनी पार्टी को मजबूत करने में जुटे हुए हैं. उनका खास फोकस दलित और मुस्लिम वोट बैंक पर है. इसी कड़ी में मेरठ में एक बड़े कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया, जहां पर उन्होंने समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के समर्थन में बयान दिया. इस दौरान चंद्रशेखर ने कहा कि “इकरा मेरी छोटी बहन जैसी हैं, उसके खिलाफ की जा रही बयानबाजी गलत है, मैं उसके साथ खड़ा हूं.”
पूर्व बीजेपी सांसद पर इकरा ने लगाए थे आरोप
दरअसल हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सपा सांसद इकरा हसन भावुक हो गई थीं. इस दौरान इकरा ने भाजपा के पूर्व सांसद प्रदीप कुमार पर आरोप लगाया था कि उन्हें “मुल्ली” और “आतंकी” कहा गया, साथ ही उनके परिवार को भी अपशब्द कहे गए. इस विवाद के बाद पश्चिमी यूपी की राजनीति गरमा गई है और अब चंद्रशेखर का समर्थन मिलने से यह मुद्दा और चर्चा में आ गया है.
गैंगस्टर बदर अली और 2 हजार समर्थक आसपा में शामिल
वहीं इस सम्मेलन के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने गैंगस्टर बदर अली और उसके करीब दो हजार समर्थकों को अपनी पार्टी में शामिल कराया. बदर अली पर गैंगस्टर एक्ट सहित 22 मुकदमे दर्ज हैं. माना जा रहा है कि आसपा (आजाद समाज पार्टी) अब पश्चिम यूपी में दलित-मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. बसपा के कमजोर होने के बाद पार्टी इसी समीकरण को अपने पक्ष में लाना चाहती है।
आजादी मांगने से नहीं, छीनने से मिलती है- चंद्रशेखर
इस दौरान कार्यक्रम में चंद्रशेखर ने कहा कि “आजादी मांगने से नहीं, छीनने से मिलती है और मेरठ इसकी गवाह धरती है.” उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज कोई नेता गरीबों की बात नहीं करता, और शिक्षा के मंदिरों में राजनीति लाना गलत है. उन्होंने छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की भी मांग की. इस मौके पर कार्यकर्ताओं ने चंद्रशेखर को नीली पगड़ी पहनाई और केतली भेंट की, जो उनकी विचारधारा का प्रतीक मानी जाती है. वहीं गुर्जर महापंचायत के दौरान रविंद्र भाटी ने उन्हें सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा दी और एक बुजुर्ग ने महर्षि वाल्मीकि की तस्वीर भेंट की.
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दलित-मुस्लिम समीकरण को दोहराने की कोशिश में आजाद
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद अब बसपा की तरह दलित-मुस्लिम समीकरण को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं. आसपा का फोकस अब मुस्लिम युवाओं पर है, जबकि दलित वोट बैंक पहले से पार्टी के साथ माना जाता है. बदर अली की एंट्री इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. बताया जा रहा है कि बदर अली 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं और आसपा से टिकट पाने की उम्मीद कर रहे हैं.