पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका के अब्राहम समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शर्त मानने से साफ इनकार कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में शामिल 5 मुस्लिम देशों को अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने चाहिए। इनमें पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, तुर्किए, मिस्र और जॉर्डन शामिल हैं। UAE और बहरीन पहले से ही इस समझौते के सदस्य हैं। ये समझौता इजरायल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित करने को लेकर है। ट्रंप का कहना है कि इससे "भविष्य में होने वाले फायदे पहले से कहीं ज्यादा हो सकते हैं".
ख्वाजा आसिफ का दो टूक जवाब
एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा, "व्यक्तिगत रूप से मुझे नहीं लगता कि हमें किसी ऐसे समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी मूल विचारधारा के खिलाफ हो"।पाकिस्तान का रुख साफ है- इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने के पक्ष में नहीं हैं।
अमेरिका पर भरोसा नहीं
आसिफ ने कहा, "चीन के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं क्योंकि अमेरिका जैसे अन्य स्रोतों के प्रति विश्वास की कमी है"। आसिफ बोले,"पाकिस्तान का रणनीतिक भविष्य अमेरिका के साथ नहीं, बल्कि चीन के साथ जुड़ा है"।
'हमें अमेरिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं'
आसिफ ने कहा कि चीन "हथियारों और अन्य चीजों का बेहद विश्वसनीय प्रोवाइडर" है। पाकिस्तान ने पिछले 4 सालों में 80% हथियार चीन से खरीदे हैं। 2018 में ट्रंप ने ट्वीट किया था। "पिछले 15 सालों में पाकिस्तान अमेरिका को बेवकूफ बनाकर 33 अरब डॉलर की सहायता ले चुका है और बदले में हमें सिर्फ झूठ और धोखे दिए"। तभी से पाकिस्तान-अमेरिका रिश्तों में खटास है।
शहबाज-मुनीर की मुश्किल
एक तरफ PM शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर ट्रंप की जय-जयकार कर रहे हैं, नोबेल की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ ख्वाजा आसिफ कैमरे पर अमेरिका को आंख दिखा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर पाकिस्तान ट्रंप की शर्त मानता है तो "अपने ही देश में भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा"। अब्राहम समझौते, गाजा, ईरान परमाणु निरस्त्रीकरण पर US की सहायता करने से पाकिस्तान 'खलनायक' बन सकता है। ट्रंप ईरान डील के लिए मुस्लिम देशों को इजरायल से जोड़ना चाहते हैं। पाकिस्तान ने साफ मना कर दिया- ख्वाजा आसिफ बोले ये "हमारी मूल विचारधारा के खिलाफ" है और अमेरिका पर रत्ती भर भरोसा नहीं। पाकिस्तान का भविष्य चीन के साथ है।