चारधाम यात्रा 2026 को लेकर उत्तराखंड सरकार ने अभी से कमर कस ली है। यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धा केंद्रित बनाने के लिए इस बार कुछ सख्त फैसले लिए जा रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा फैसला बदरीनाथ धाम में सिंहद्वार के आगे मोबाइल फोन ले जाने पर रोक से जुड़ा है। प्रशासन का मानना है कि रील और वीडियो बनाने के चलते बार-बार अव्यवस्था की स्थिति बनती है।
अक्षय तृतीया से होगी यात्रा की शुरुआत
चारधाम यात्रा का शुभारंभ 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन होगा। इसी दिन यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीखों की औपचारिक घोषणा महाशिवरात्रि के मौके पर बीकेटीसी की ओर से की जाएगी। अभी यात्रा शुरू होने में करीब तीन महीने का समय है, लेकिन तैयारियां अब तेज हो चुकी हैं।
ऋषिकेश में हुई अहम बैठक
चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे ने की। इसमें आईजी राजीव स्वरूप सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में यात्रा प्रबंधन, सुरक्षा, ट्रैफिक कंट्रोल और श्रद्धालुओं की सुविधा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
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सिंहद्वार के आगे मोबाइल पर सख्ती
बैठक में सबसे अहम मुद्दा रीलबाजी और वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर रहा। अधिकारियों ने माना कि मोबाइल फोन के कारण धाम परिसर में भीड़ रुक जाती है और सुरक्षा में दिक्कत आती है। इसी वजह से प्रस्ताव रखा गया कि बदरीनाथ धाम में सिंहद्वार के आगे मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। इस फैसले का मकसद श्रद्धा के माहौल को बनाए रखना और अव्यवस्था पर लगाम लगाना है।
सुरक्षा और व्यवस्था पर खास फोकस
आईजी राजीव स्वरूप ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढिलाई न हो। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने, ट्रैफिक को सुचारू रखने और आपात स्थिति से निपटने के लिए ठोस योजना बनाई जाए। बैठक में पौड़ी, टिहरी, चमोली, हरिद्वार, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी शामिल रहे।
शीतकालीन यात्रा में भी दिख रहा उत्साह
चारधाम यात्रा के बंद रहने के दौरान भी श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई है। शीतकालीन प्रवास स्थलों पर लगातार भक्त पहुंच रहे हैं। अब तक करीब 28 हजार श्रद्धालु शीतकालीन धामों में दर्शन कर चुके हैं। प्रतिदिन औसतन 500 से 600 श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। बाबा केदार के शीतकालीन प्रवास स्थल ऊखीमठ में अब तक 17 हजार से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि बदरीनाथ की पूजा पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर में हो रही है।