उत्तराखंड में भारी बारिश और जगह-जगह भूस्खलन के कारण चारधाम यात्रा को दो दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। मंगलवार और बुधवार को श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आगे नहीं बढ़ सकेंगे। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला लिया है। गढ़वाल मंडल प्रशासन के मुताबिक कई जगह यात्रा मार्ग भूस्खलन के कारण बंद हो गए हैं, जबकि मौसम विभाग की तरफ से भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया गया है।
भूस्खलन से कई जगह रास्ते प्रभावित
गढ़वाल मंडल के आयुक्त के मुताबिक चारधाम यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। इसके कारण रास्ते बाधित होने के साथ यात्रियों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है। भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन फिलहाल किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। इसी वजह से यात्रा रोकने का फैसला किया गया है। मौसम और रास्तों की स्थिति बेहतर होने के बाद चारधाम यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी।
अगले 15 घंटे मौसम को लेकर अहम
गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और आसपास के इलाकों में अगले 15 घंटों के दौरान मौसम खराब रहने की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में बिजली कड़कने के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। आंधी-तूफान की भी आशंका जताई गई है। लोगों से सतर्क रहने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और बिना जरूरत घर या सुरक्षित ठिकानों से बाहर नहीं निकलने की अपील की गई है।
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हरिद्वार-ऋषिकेश से शुरू होती है यात्रा
चारधाम यात्रा सामान्य तौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। इसके बाद श्रद्धालु यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंचकर दर्शन करते हैं। हिमालयी क्षेत्र में होने के कारण बारिश और भूस्खलन के दौरान इन रास्तों पर यात्रा मुश्किल हो सकती है। चारधाम यात्रा आमतौर पर मई-जून से नवंबर तक चलती है, जबकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण धामों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी यात्रा
सनातन धर्म में चारधाम यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक चारों धामों की यात्रा करने से पुण्य मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। यही वजह है कि हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। प्रशासन के सामने खराब मौसम के दौरान इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती रहती है।
मौसम सुधरने के बाद शुरू होगी यात्रा
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं को सुरक्षित रखना और भूस्खलन से प्रभावित रास्तों की स्थिति सामान्य करना है। यात्रियों को यात्रा दोबारा शुरू होने की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की सलाह दी गई है। मौसम अनुकूल होने और रास्तों को सुरक्षित पाए जाने के बाद चारधाम यात्रा फिर से शुरू की जाएगी। ऐसे में अगले दो दिन उत्तराखंड के मौसम और यात्रा मार्गों की स्थिति बेहद अहम रहने वाली है।