मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से चीतों की आवाजाही को राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक बढ़ाने की योजना फिलहाल रोक दी गई है। विशेषज्ञों की राउंड टेबल चर्चा और कई अहम कारणों के चलते सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया। प्रोजेक्ट चीता के तहत इन जानवरों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बनाने की तैयारी थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों और चुनौतियों को देखते हुए समझौते पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। अब चीतों की सुरक्षा और संख्या पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
क्या था प्रस्ताव?
प्रोजेक्ट चीता के तहत नवंबर 2024 में 17,000 वर्ग किलोमीटर का कॉरिडोर प्रस्तावित किया गया था। इसमें मध्य प्रदेश और राजस्थान के हिस्से शामिल करने का विचार था। इस कॉरिडोर का मकसद था चीतों के लिए बड़े इलाके उपलब्ध कराना ताकि वे सुरक्षित तरीके से अपने क्षेत्र को विकसित कर सकें और राज्यों के बीच आसानी से आवाजाही कर सकें।
क्यों रोकी गई योजना?
इस योजना को रोकने के पीछे कई अहम वजहें सामने आई हैं:
1. राज्यों के बीच चीतों की आवाजाही से शिकारियों को फायदा मिल सकता है।
2. वन क्षेत्रों में बाघ और तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है, जिससे चीतों के साथ संघर्ष का खतरा है।
3. दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से भविष्य में और चीते लाने की योजना है, लेकिन हाल ही में हुई मौतों के चलते एहतियात बरती जा रही है।
निगरानी होगी कड़ी
यदि चीते स्वेच्छा से दूसरे राज्यों की ओर बढ़ते हैं तो उन्हें रोका नहीं जाएगा। इसके बजाय उनकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। फिलहाल सरकार का जोर प्रदेश के भीतर चीतों की संख्या और सुरक्षा को मजबूत करने पर है।