Chhath Bihar Travel Crisis : दिवाली और छठ पर बिहार लौटने की तैयारी कर रहे लाखों प्रवासियों के सामने इस बार सफर का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। दिल्ली, मुंबई, गुजरात और दक्षिण भारत के शहरों से बिहार आने वाली नियमित ट्रेनों में सीटें मिलना मुश्किल हो गया है। कई ट्रेनों में लंबी वेटिंग है, जबकि कुछ तारीखों पर नई बुकिंग भी बंद हो चुकी है। दूसरी तरफ हवाई टिकटों का किराया 25 हजार से 35 हजार रुपये तक पहुंच रहा है। बसों से सफर करना भी आसान नहीं है। ऐसे में परिवार के साथ घर लौटने वालों को बजट और समय के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
ट्रेनों में टिकट की उपलब्धता खत्म
दिल्ली से बिहार आने वाली संपूर्ण क्रांति, तेजस राजधानी, मगध एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में त्योहार के आसपास सीटों की भारी कमी है। नई दिल्ली से राजेंद्र नगर जाने वाली तेजस राजधानी में 5 से 7 नवंबर तक बुकिंग की स्थिति रिग्रेट दिखाई गई। मगध एक्सप्रेस में भी इन तारीखों पर सीटें उपलब्ध नहीं हैं। आनंद विहार से दरभंगा जाने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस में स्लीपर श्रेणी में लंबी वेटिंग है। मुंबई से आने वाली एलटीटी-राजगीर एक्सप्रेस में भी 5 से 10 नवंबर तक यही स्थिति है। एलटीटी-भागलपुर एक्सप्रेस में भी कई तारीखों पर टिकट मिलना मुश्किल है।
फ्लाइट का किराया आम आदमी के बजट से बाहर
ट्रेन में टिकट नहीं मिलने के बाद हवाई सफर का विकल्प बचता है, लेकिन इसका किराया भी काफी बढ़ गया है। मुंबई और बेंगलुरु से पटना और दरभंगा आने वाली उड़ानों का एकतरफा किराया 25 से 26 हजार रुपये तक पहुंच गया है। छठ के नजदीक कुछ तारीखों पर किराया 35 हजार रुपये से भी ज्यादा दिख रहा है। अहमदाबाद और गुजरात के दूसरे शहरों से आने वाली उड़ानों में भी टिकट महंगे हैं। दिल्ली से पटना का किराया 5 से 7 नवंबर के बीच करीब 8 हजार से 9,500 रुपये बताया गया है। हैदराबाद से पटना आने का किराया कुछ तारीखों पर 23 हजार रुपये से ज्यादा है।
सरकारी बसों से मिल सकता है राहत का रास्ता
ट्रेन और फ्लाइट के बाद बसें यात्रियों के लिए एक विकल्प हैं। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने दिवाली और छठ को देखते हुए 5 से 20 नवंबर के बीच करीब 200 विशेष बसें चलाने की तैयारी की है। ये बसें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और झारखंड को बिहार से जोड़ेंगी। यात्रियों के लिए एसी सीटर, एसी स्लीपर, सेमी स्लीपर और नॉन एसी बसों की व्यवस्था की गई है। निगम की ओर से एसी सीटर और एसी स्लीपर बसों के टिकट पर 30 प्रतिशत से अधिक की सब्सिडी भी दी जा रही है। यात्री निगम की आधिकारिक वेबसाइट से टिकट बुक कर सकते हैं।
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लंबी दूरी की बस यात्रा भी आसान नहीं
महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत से बिहार आने वालों के लिए बस से सफर करना काफी थकाने वाला हो सकता है। इन शहरों से बिहार की दूरी कई जगह 1,500 से 2,000 किलोमीटर या उससे ज्यादा है। निजी बसों का किराया भी प्रति यात्री 3 हजार रुपये से अधिक बताया गया है। सरकारी बसों से आने के लिए कई यात्रियों को रास्ते में बस बदलनी पड़ सकती है। परिवार के तीन-चार सदस्यों के साथ सफर करने पर खर्च और परेशानी दोनों बढ़ जाते हैं। रेलवे ने भी कई शहरों से बिहार के लिए पूजा विशेष ट्रेनें चलाई हैं, लेकिन उनमें भी सभी यात्रियों को सीट नहीं मिल पा रही है।
कार पूल और दूसरी तारीखों का विकल्प
करीब 1,000 से 1,200 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले यात्री ब्ला-ब्ला जैसी कार पूल सेवा या ओला-उबर जैसी टैक्सी का विकल्प देख सकते हैं। कार पूल में प्रति व्यक्ति करीब 2,000 से 2,500 रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है, लेकिन त्योहार के आसपास इन सेवाओं में भी सीटें सीमित हैं। यात्रियों के लिए बेहतर विकल्प यह हो सकता है कि वे आसपास के रेलवे स्टेशन, दूसरी तारीखों और विशेष ट्रेनों की उपलब्धता भी जांचें। सरकारी बसों के टिकट भी देख सकते हैं। इस बार छठ पर घर पहुंचने के लिए यात्रियों को पहले से योजना बनानी पड़ रही है।