
छठ पूजा, जिसे सूर्य उपासना का महापर्व कहा जाता है, उत्तर भारत विशेषकर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति से मनाया जाता है। यह पर्व चार दिनों तक चलता है, जिनमें हर दिन का अपना विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व होता है। इन चार दिनों में दूसरा दिन ‘खरना’ या ‘लोहंडा’ सबसे पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से व्रती (उपवासी) वास्तविक तप और अनुशासन की शुरुआत करते हैं। वर्ष 2025 में छठ का खरना दिन भक्ति, पवित्रता और आत्म-शुद्धि का अद्भुत संगम लेकर आएगा।
खरना का अर्थ और महत्त्व
‘खरना’ शब्द का अर्थ है — पवित्रता और संयम की स्थापना। इस दिन व्रती सुबह से लेकर सूर्यास्त तक निर्जला उपवास रखते हैं। यह उपवास शरीर और मन दोनों की शुद्धि का प्रतीक है। मान्यता है कि खरना के दिन सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और व्यक्ति को अगले दिनों के कठिन व्रत के लिए शक्ति प्राप्त होती है।खरना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्म-नियंत्रण और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है। यह दिन व्रती को विनम्रता, श्रद्धा और शुद्ध आचरण का अभ्यास सिखाता है।
खरना की पूजन विधि
निर्जला उपवास की शुरुआत: सूर्योदय के साथ व्रती भोजन और जल का त्याग करते हैं।
शाम की तैयारी: सूर्यास्त के बाद घर या आंगन को गंगाजल से शुद्ध कर पूजा स्थल तैयार किया जाता है।
भोग बनाना: गुड़, चावल और गाय के दूध से खीर बनाई जाती है, जिसे ‘रसीया’ कहा जाता है। साथ ही गेहूं के आटे से बनी रोटी और केले का प्रसाद तैयार किया जाता है।
सूर्य अर्घ्य और पूजा: सूर्यास्त के समय सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूजा की जाती है और छठी मैया से आशीर्वाद मांगा जाता है।
प्रसाद ग्रहण: पूजा के बाद व्रती पहले प्रसाद ग्रहण करते हैं और फिर इसे परिवार और पड़ोसियों में बांटते हैं।
खरना से मिलने वाले लाभ
खरना व्रत से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है। सूर्य देव की कृपा से रोग, दुःख और बाधाएँ दूर होती हैं। यह दिन जीवन में अनुशासन और आध्यात्मिक संतुलन का संचार करता है, जिससे व्यक्ति की सोच और कर्म दोनों में उजाला आता है।
संयम, कृतज्ञता और पवित्रता का संदेश
छठ खरना 2025 न केवल पूजा का एक पर्व है, बल्कि यह जीवन में संयम, कृतज्ञता और पवित्रता का संदेश देता है। जब भक्त सच्चे मन से सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हैं, तो उनके जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता के नए द्वार खुल जाते हैं। खरना का यह दिन भक्ति, धैर्य और आस्था की वह किरण है जो जीवन को प्रकाशमय बना देती है।