
छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और आत्मसंयम का उत्सव है। हर साल जब सूर्य उपासना का यह चार दिवसीय महापर्व आता है, तो घर-घर में विशेष ऊर्जा और भक्ति का वातावरण बन जाता है। 2025 में यह पावन पर्व 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। अगर आप इस बार घर में पहली बार छठ पूजा मना रहे हैं, तो जानिए 66 साल की दादी के अनुभव से — कैसे बनता है खरना प्रसाद और किन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यान।
खरना का महत्व
छठ पूजा का दूसरा दिन, जिसे खरना कहा जाता है, सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद भगवान सूर्य व छठी मैया को प्रसाद अर्पित कर उपवास तोड़ते हैं। प्रसाद को अत्यंत शुद्धता से बनाया जाता है क्योंकि इसे पूजा का आत्मिक हिस्सा माना जाता है। खरना का प्रसाद न केवल व्रती बल्कि पूरे परिवार के लिए पवित्र भोजन का प्रतीक है।
दादी की विधि
66 वर्षीया दादी बताती हैं कि खरना प्रसाद का स्वाद उसकी सादगी में छिपा है। इसके लिए सबसे पहले मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी या गोबर के उपले जलाकर पकाने की परंपरा रही है।
सामग्री: गुड़, चावल, दूध, घी और केले के पत्ते।
विधि
चावल को धोकर देसी घी में हल्का भूनें।
पानी और गुड़ डालकर धीमी आंच पर पकाएँ।
जब खीर तैयार हो जाए, तो उसमें दूध मिलाएँ और कुछ देर तक पकने दें।
प्रसाद को केले के पत्ते में ढककर ठंडा करें और मिट्टी के दीप के साथ अर्पित करें।
दादी कहती हैं — “छठ पूजा में स्वाद नहीं, भावना मायने रखती है। प्रसाद जितना शुद्ध होगा, उतनी गहरी होगी आस्था।”
पहली बार करने वालों के लिए दादी की सलाह
भोजन पकाते समय रसोई पूरी तरह साफ रखें।
नमक, प्याज और लहसुन का प्रयोग बिल्कुल न करें।
प्रसाद बनाने से पहले स्नान कर साफ कपड़े पहनें।
पूरे समय मन शांत और भक्ति में डूबा रहे — यही सच्ची पूजा है।