छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कृत्रिम गर्भाधान (AI) तकनीक के जरिए दुनिया की सबसे छोटी मानी जाने वाली पुंगनूर नस्ल की मादा बछिया का जन्म हुआ है। सिर्फ 17 से 24 इंच की ऊंचाई वाली यह नस्ल अपने उच्च गुणवत्ता वाले दूध के लिए मशहूर है, जिसकी कीमत 1000 से 2000 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचती है। वहीं इसका घी तो बाजार में 50 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकता है। इस जन्म ने पूरे क्षेत्र में उत्सुकता बढ़ा दी है।
छत्तीसगढ़ में जन्मी पुंगनूर नस्ल की अनोखी बछिया
जशपुर जिले के गोढ़ीकला और करमीटिकरा गांव में जन्मी यह मादा बछिया लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पुंगनूर नस्ल को दुनिया की सबसे छोटी गाय माना जाता है, जिसकी कद-काठी बेहद नाजुक और ऊंचाई मात्र दो फीट से भी कम होती है। यह नस्ल सामान्यतः दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में पाई जाती है, लेकिन अब इसका सफल प्रजनन छत्तीसगढ़ में भी संभव हो पाया है।
AI तकनीक से हुई ब्रीडिंग ने बनाया नया इतिहास
स्थानीय पशुपालक खगेश्वर यादव ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अपने खेत में इस विशेष नस्ल को विकसित करने की कोशिश की। AI प्रक्रिया के लिए एक निजी संस्था से पुंगनूर सांड का सीमेन मंगवाया गया और 29 जनवरी 2025 को कृत्रिम गर्भाधान कराया गया था। लगभग 284 दिनों बाद 11 नवंबर 2025 को गाय ने स्वस्थ और पूर्ण विकसित मादा बछिया को जन्म दिया। यह उपलब्धि उन्नत पशुपालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
दूध और घी की कीमतें बनी चर्चा का विषय
पुंगनूर नस्ल अपने उच्च गुणवत्ता वाले दूध के लिए प्रसिद्ध है। इसका दूध औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है, जिसकी बाजार कीमत 1000 से 2000 रुपये प्रति लीटर तक रहती है। वहीं यही नस्ल का घी तो 50 हजार रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है, जिसकी वजह इसके स्वास्थ्यवर्धक तत्व और दुर्लभता है। यही कारण है कि ग्रामीणों में उत्साह और जिज्ञासा दोनों बढ़ी हुई है।
लोगों की बढ़ रही दिलचस्पी, गांव में लगी भीड़
जशपुर में जन्मी इस अनोखी बछिया को देखने के लिए हर दिन आसपास के गांवों और जिलों से लोग पहुंच रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह घटना उन्नत कृषि और पशुपालन तकनीक की सफलता के रूप में देखी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, यह उपलब्धि आने वाले समय में प्रदेश में पशुपालन के नए अवसर खोल सकती है और दुर्लभ नस्लों के संरक्षण को भी बढ़ावा देगी।