रायपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित तुलसी गांव अब देशभर में ‘यूट्यूबर गांव’ के नाम से मशहूर हो चुका है। लगभग 3,000 की आबादी वाले इस गांव में 1,000 से ज्यादा लोग यूट्यूब पर कंटेंट बना रहे हैं। कैमरा, ट्राइपॉड और वीडियो आइडिया यहां की रोज़मर्रा की चर्चा का हिस्सा हैं। गांव के बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं—सभी डिजिटल दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं।
हर घर में कैमरा और ट्राइपॉड
तुलसी गांव की गलियों में अगर आप जाएंगे तो किसी न किसी घर से कैमरे की रिकॉर्डिंग की आवाज़ सुनाई देगी। यहां हर घर में कोई न कोई व्यक्ति वीडियो शूट करता है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी कैमरे के सामने बेझिझक अपना हुनर दिखाते हैं। किसी के चैनल पर कॉमेडी चलती है तो कोई गांव की संस्कृति और जीवनशैली को दिखाता है।
साझेदारी से बनता है कंटेंट
यहां यूट्यूबिंग सिर्फ़ व्यक्तिगत शौक नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास है। गांव के लोग मिलकर स्क्रिप्ट लिखते हैं, किरदार तय करते हैं और साथ में वीडियो शूट करते हैं। कई परिवारों में तीन पीढ़ियां एक साथ वीडियो बनाती हैं—दादी, बेटे और पोते तक सब शामिल रहते हैं। इस सहयोग से गांव में रचनात्मक माहौल और आपसी जुड़ाव बढ़ा है।
लोकल कलाकारों को मिला मंच
पहले जो कलाकार केवल स्थानीय रामलीला या मेलों में प्रदर्शन करते थे, अब वही यूट्यूब के ज़रिए लाखों दर्शकों तक पहुंच रहे हैं। गांव के कई युवा अपने चैनलों से कमाई भी कर रहे हैं और नई प्रेरणा दे रहे हैं कि गांव से भी डिजिटल सफलता हासिल की जा सकती है।
डिजिटल सशक्तिकरण की मिसाल
तुलसी गांव यह साबित कर रहा है कि रचनात्मकता किसी सीमा में नहीं बंधी। यह गांव न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गया है। यहां की कहानी बताती है कि अगर लगन और सहयोग हो तो इंटरनेट गांव की सोच को भी वैश्विक पहचान दिला सकता है।