
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में हुए कफ सिरप कांड के बाद अब जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में दो और कफ सिरप बच्चों के लिए जानलेवा पाए गए हैं। इनमें 0.01 प्रतिशत से ज्यादा डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया है, जो किडनी फेलियर और ब्रेन डैमेज का कारण बन सकता है। यह जहरीला रसायन पहले भी कई देशों में बच्चों की मौत की वजह बन चुका है। जांच रिपोर्ट ने सिस्टम की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच
में सामने आए दो खतरनाक
सिरप
छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड के बाद प्रदेशभर में दवा दुकानों से 19 सैंपल लिए गए थे। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि री लाइफ (Re-Life) और Respifresh-Tr नामक दो सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा निर्धारित सीमा से ज्यादा है। यह रसायन मानव शरीर के लिए अत्यंत विषैला होता है और बच्चों के अंगों पर सबसे पहले असर डालता है।
डायएथिलीन ग्लाइकॉल क्या है और कितना खतरनाक?
डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) एक औद्योगिक सॉल्वेंट है, जिसका प्रयोग तकनीकी उत्पादों में किया जाता है, न कि दवाओं में। जब यह शरीर में प्रवेश करता है तो किडनी, लिवर और ब्रेन को नुकसान पहुंचाता है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों के लिए इसकी मामूली मात्रा भी जानलेवा हो सकती है। WHO ने पहले भी इस तत्व को ‘Highly Toxic’ घोषित किया था।
‘श्री सन कंपनी’ का डायरेक्टर फरार
इस जहरीले सिरप से जुड़ी कंपनी श्री सन फार्मा का डायरेक्टर जांच शुरू होते ही फरार हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी वर्ष 2009 में बंद घोषित हुई थी, लेकिन बाद में नाम बदलकर दोबारा उत्पादन शुरू कर दिया गया। यह फैक्ट्री तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित है और मात्र 2000 वर्ग फीट में करीब 60 से ज्यादा प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे थे।
फैक्ट्री में जंग लगे उपकरण और घटिया क्वालिटी
जांच टीम ने पाया कि फैक्ट्री के कई उपकरणों पर जंग लगी थी और उत्पादन के दौरान बेसिक सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की गई। दवाओं में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की क्वालिटी टेस्टिंग भी नहीं की जाती थी। यह साफ संकेत है कि कंपनी नियामक एजेंसियों की आंखों में धूल झोंककर लंबे समय से उत्पादन कर रही थी।
सरकार और ड्रग विभाग ने कसे शिकंजे की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल इन दोनों सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी है और सभी जिलों में इनके सैंपल कलेक्ट किए जा रहे हैं। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने भी रिपोर्ट तलब की है। अगर जांच में पुष्टि होती है, तो संबंधित कंपनी का लाइसेंस रद्द कर उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।
बच्चों
की सुरक्षा पर फिर उठा
सवाल
यह मामला एक बार फिर से यह सवाल खड़ा करता है कि भारत में फार्मा सेक्टर की निगरानी व्यवस्था कितनी कमजोर है। एक के बाद एक जहरीले सिरप का सामने आना न सिर्फ हेल्थ सिस्टम की चूक है बल्कि यह मासूम बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। अब जिम्मेदारी तय करना और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।