मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में दूषित कफ सिरप बच्चों की मौत का बड़ा कारण बन गया है। पिछले 20 दिनों में सात मासूमों ने दम तोड़ दिया और पांच बच्चे अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। जांच रिपोर्ट में इस कफ सिरप में खतरनाक केमिकल डायएथिलीन ग्लायकॉल की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जो किडनी को नुकसान पहुंचाता है। प्रशासन ने फिलहाल दो कफ सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन जिम्मेदार फार्मा कंपनियों और सप्लायर्स पर कार्रवाई कब होगी, यह सवाल बना हुआ है।
मासूमों की मौत से दहशत
छिंदवाड़ा जिले में बच्चों की मौत का पहला मामला 24 अगस्त को सामने आया था। 4 से 26 सितंबर के बीच परासिया इलाके में छह बच्चों की मौत हुई। इन सभी में एक जैसी लक्षण पाए गए और ज्यादातर ने नागपुर के अस्पतालों में दम तोड़ा। वर्तमान में पांच बच्चे गंभीर हालत में इलाजरत हैं।
बायोप्सी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार मृत बच्चों की किडनी बायोप्सी में पाया गया कि उनकी किडनियों को जहरीले केमिकल से नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में टॉक्सिन मीडिएटेड इंजरी की पुष्टि हुई है। यह स्पष्ट हुआ कि सिरप में मिला डायएथिलीन ग्लायकॉल ही मौतों की असली वजह है। यह केमिकल किडनी को फेल कर देता है।
दो कफ सिरप पर रोक
जिले में नेक्सट्रो-डीएस और कोल्ड्रिफ कफ सिरप को बिक्री और उपयोग से तुरंत रोक दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि वे मरीजों को इन सिरप को न लिखें। भोपाल में भी एहतियातन दोनों दवाओं की बिक्री पर रोक लगाई गई है।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाया है कि जब मौतों की वजह स्पष्ट हो चुकी है, तो दोषी कंपनी और सप्लायर पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। स्वास्थ्य विभाग पर आरोप है कि उसने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे मौतों का सिलसिला बढ़ गया। अब लोगों की मांग है कि जिम्मेदारों को सख्त सजा दी जाए।